ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है इसके कार्य प्रकार (Operating System in Hindi)

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ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है (What Is Operating System in Hindi) : दोस्तों ! अगर आपने हमारी पिछली पोस्ट को पढ़ा हो तो उसमे आपने “ऑपरेटिंग सिस्टम ( Operating System )” शब्द के बारे में कई बार पढ़ा होगा। दोस्तों अपने computer और mobile में Operating System का इस्तेमाल तो हम सब ही करते हैं, लेकिन क्या आपको पता है की आख़िर Operating System होता क्या है आपके मन में ऑपरेटिंग सिस्टम शब्द को लेकर कई सारे सवाल भी आया हो कि आखिर ” ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है ?” Operating System कैसे काम करता है , Operating System कितने प्रकार के होते है – Types of Operating System in Hindi। तो दोस्तों अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योकि आज की इस पोस्ट में मैं आपको ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में संपूर्ण जानकारी देने वाला हूँ हिंदी में ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है इसके कार्य प्रकार , ऑपरेटिंग सिस्टम का इतिहास | History Of Operating System in Hindi इस सवाल का जवाब दूंगा।

Operating System क्या होता है ?

Operating System क्या होता है ?
Operating System क्या होता है

आज भी बहुत से लोगों को Operating System क्या होता है ? मालूम नहीं है , और उनके मन में जिज्ञाषा होती है की आखिर Operating System होता क्या है , Operating System काम कैसे करता है जैसा कि आप नाम से ही समझ सकते हो कि Operating System कम्प्यूटर सिस्टम को ऑपरेट ( Operate – संचालित करना ) करने वाला भाग है जिसके द्वारा कम्प्यूटर ( Computer ) को संचालित किया जाता है। ऑपरेटिंग सिस्टम को हिंदी में “प्रचालन तंत्र” भी कहते है।

जिस प्रकार बिना आत्मा के शरीर बेजान होता है उसी प्रकार बिना Operating System के कम्प्यूटर या मोबाइल ( Mobile ) आदि भी बेजान होते है क्योकि बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के कंप्यूटर या मोबाइल आदि सिर्फ एक खाली डिब्बा है। आप सोच रहे होंगे कि यह आत्मा और शरीर वाली बात तो मैंने पिछली पोस्ट में सॉफ्टवेयर ( Software ) और हार्डवेयर ( Hardware ) के बारे में भी कही थी, तो यह बात इसमें कैसे लागू होगी।

तो मैं यहाँ आपको बता देना चाहता हूँ कि ऑपरेटिंग सिस्टम भी एक प्रकार का सॉफ्टवेयर है, जो सिस्टम सॉफ्टवेयर ( System Software ) के अंतर्गत आता है। 

कम्प्यूटर सिस्टम में जितने भी Hardware components होते है उदहारण के लिए जैसे – Motherboard , CPU ((Central Processing Unit) , RAM , SSDs (Solid-state drive) , Optical drives , NIC (Network interface card) , वे सभी OS ( Operating System ) पर निर्भर होते है क्योकि बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के कोई भी हार्डवेयर काम नहीं कर सकता। यदि OS न हो तो कंप्यूटर अपने सभी हार्डवेयरो के बीच में सम्बन्ध स्थापित नहीं कर पायेगा। या चल नहीं पायेगा

OS को हम कंप्यूटर का मेनेजर ( Manager – प्रबंधक ) भी कह सकते है। आसान शब्दों में कहे तो OS (Operating System) कम्प्यूटर को ऑपरेट करने वाला ऐसा सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटर को कंट्रोल ( Control – नियंत्रण ) भी करता है और मैनेज भी। हमारे कंप्यूटर में जो भी सॉफ्टवेयर होते है वो सभी OS पर आधारित होते है। ऑपरेटिंग सिस्टम छोटे – छोटे प्रोग्रामो से मिलकर बनता है।

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ऑपरेटिंग सिस्टम का इतिहास | History Of Operating System in Hindi

ऑपरेटिंग सिस्टम का इतिहास | History Of Operating System in Hindi
ऑपरेटिंग सिस्टम का इतिहास | History Of Operating System in Hindi

वास्तव में ऑपरेटिंग सिस्टम का इतिहास (History Of Operating System) आज से लगभग 72 साल पुराना है, Operating System वास्तविक कार्य के लिए उपयोग किया जाने वाला पहला ऑपरेटिंग सिस्टम GM-NAA I/O था, जिसका निर्माण 1950-56 में जनरल मोटर्स के रिसर्च डिवीजन द्वारा अपने IBM 701 के लिए किया गया था।

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IBM मेनफ्रेम के लिए अधिकांश अन्य शुरुआती ऑपरेटिंग सिस्टम उस समय यह ऑपरेटिंग सिस्टम IBM नामक मेनफ़्रेम कंप्यूटर को चलाने के लिए बनाया गया था.। “एटलस सुपरवाइजर” को पहला आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम माना जाता है, जिसे वर्ष 1962 में Atlas Super  Computer के लिए बनाया गया था। यह Virtual Memory वाला पहला ऑपरेटिंग सिस्टम था।

दोस्तों अगर हम windows Operating System के इतिहास की बात की जाए तो क्या आप जानते हैं की Microsoft ने पहली बार जब ऑपरेटिंग सिस्टम का Devlopment किया था, तो इसे Windows नाम न देकर बल्कि उन्होंने इसे Ms-Dos नाम दिया गया।

इस ऑपरेटिंग सिस्टम को इसे 1981 में एक सिएटल कंपनी से 86-डॉस सॉफ्टवेयर खरीदकर बनाया गया था तथा आईबीएम (IBM) कंप्यूटर की जरूरतों को पूरा करने के लिए इसे Modification किया गया था। उसके बाद वर्ष 1985 में Ms-Dos के स्थान पर Windows Operating System का पहली बार इस्तेमाल किया गया। तथा उस समय एक ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (GUI) का निर्माण किया जिसे Ms- Dos से जोड़ा (Pair) किया गया। वही आज का दौर है जहाँ Apple ios तथा विंडोज , लिनक्स के कई सारे ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध हैं जिनमें से सबका चहेता ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्राइड भी शामिल है।

  • टेप स्टोरेज को प्रबंधित करने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम को पहली बार 1950 के दशक के अंत में विकसित किया गया था
  • जनरल मोटर्स रिसर्च लैब ने अपने IBM 701 . के लिए 1950 के दशक की शुरुआत में पहला OS लागू किया था
  • 1962 के दशक के मध्य में, ऑपरेटिंग सिस्टम ने डिस्क का उपयोग करना शुरू किया
  • 1962 के दशक के अंत में, यूनिक्स ओएस का पहला संस्करण विकसित किया गया था
  • Microsoft द्वारा बनाया गया पहला OS DOS था। इसे 1981 में एक सिएटल कंपनी से 86-डॉस सॉफ्टवेयर खरीदकर बनाया गया था
  • वर्तमान में लोकप्रिय ओएस विंडोज पहली बार 1985 में अस्तित्व में आया जब एक जीयूआई बनाया गया और एमएस-डॉस के साथ जोड़ा गया।

प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण

लोग अपने कार्य के अनुसार अलग अलग Os (Operating System) का इस्तेमाल करना पसंद करते है. यहाँ आपको कंप्यूटर और मोबाइल मैं प्रयोग होने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम लिस्ट शेयर किया हूँ, जो ज्यादातर लोग इस्तिमाल करना पसंद करते है.

कंप्यूटर के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System)

  • MS-Windows
  • Ubuntu
  • Mac OS
  • Fedora
  • Solaris
  • Free BSD
  • Chrome OS
  • CentOS
  • Debian
  • Deepin
  • Linux
  • MS-DOS

मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System)

  • Android (Google)
  • iOS (Apple)
  • Bada (Samsung)
  • Blackberry OS (Research in Motion)
  • Windows OS (Microsoft)
  • Symbian OS (Nokia)
  • Tizen (Samsung)

Operating System की आवश्यकता

Operating System संपूर्ण Computer/Mobile का नियंत्रण एवं संचालन करता है. इसी के द्वारा Computer को मैनेज किया जाता है. Os (Operating System) ऑपरेटिंग सिस्टम आपके कंप्यूटर का बोहोत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह Computer के Hardware and Software बीच में आपस में तालमेल बनाये रखता है उपयोगकर्ता को कम्प्यूटर पर आसानी से कार्य करने कि योग्यता देता है.

ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य

वैसे देखा जाए तो आज कल के Computer हो या Smartphone बहुत सारे काम को एक साथ करने की छमता रखते है, लेकिन सबसे पहले जब आप Computer को On (चालू) करते हो तब Operating System पहले Main Memory मतलब RAM में load होता है और इसके बाद ये User Software को कौन कौन से Hardware चाहिए वो सब Allocate करता है. निचे हमने Operating System के खास कार्यों को बताया हैं

  • कम्प्यूटर और यूजर ( User – उपयोगकर्ता ) के बीच के संचार को आसान बनाना।
  • कम्प्यूटर के सभी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच तालमेल स्थापित करना और इन पर नियन्त्रण रखना।
  • यूजर के कमांड ( Command – आदेश ) का पालन कर, उस पर कार्य करना आदि। 
  • ऑपरेटिंग सिस्टम के द्वारा हम एक समय में बहुत सारे काम कर सकते है। 
  • फाइलों का और मैमोरी का प्रबंधन करना।

Operating System कैसे काम करता है?

दोस्तों Operating System कैसे काम करता है का सीधा और साफ़-जवाब है. हमारे कंप्यूटर सिस्टम में Operating System ही एक ऐसा Softwere होता है जो Booting Process पूरा होने के बाद सबसे पहले हमारे सामने मॉनिटर स्क्रीन पर दिखाई देता है और एक यूजर फ्रेंडली प्लेटफार्म प्रस्तुत करता है जिसके बाद ही हम अपना कोई काम करते है।

Operating System का Working concept कुछ इस प्रकार होता है की, जब आप कंप्यूटर चालू करते हैं तो सबसे पहले कंप्यूटर में बूटिंग प्रक्रिया होती है जिसमे सभी कंप्यूटर हार्डवेयर पार्ट्स तथा उसमे लगे सभी डिवाइस की टेस्टिंग होती है यदि सभी पास हो जाती है तो आगे Boot Drive में मोजूद ऑपरेटिंग सिस्टम Softwere की प्रोग्राम मुख्य मेमोरी (RAM) में लोड होती है

और सब कुछ सही होने के बाद आगे हमारे सामने Desktop Screen दिखाई देती है जिसके बाद ऑपरेटिंग सिस्टम हमें हार्डवेयर का उपयोग करने की अनुमति देता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम लोड होने के बाद हम कंप्यूटर को जो भी कमांड देंगे उसके अनुकूल ऑपरेटिंग सिस्टम हमें रिस्पांस देगी तथा रिसोर्सेज मुहैया कराएगी जैसे- यदि हमें कोई MP3 Audio को चलाना होगा तो हम जैसे ही MP3 Audio File पर क्लिक करेंगे वैसे ही हमारे सामने Audio Player पर वह Audio चलना चालू हो जायेगा।

हालाँकि इसके कार्य केवल ऑडियो तक ही सिमित नहीं है बल्कि ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) हमें कई तरह की फंक्शनलिटीज़ उपलब्ध कराती है जिसका उपयोग से ही हम File Downloading , Office Work , Internet surfing , Online Meting , Online Study , Research , Design , Programing , Mining , Bussiness Work इत्यादि अपने दैनिक जीवन के कार्यों को कर पाते है,

Operating System के प्रकार Types of Operating System in Hindi

Operating System के प्रकार – Types of Operating Systems in Hindi
Operating System के प्रकार – Types of Operating System in Hindi

OS के बहुत सारे प्रकार होते है। मैं यहाँ आपको कुछ मुख्य प्रकार के OS के बारे में बताऊंगा। ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ प्रकार इस प्रकार हैं –

Single-user Operating System

ऐसा OS जिसमे एक समय पर एक ही यूजर ( User ) काम कर सकता हो, वह Single User OS कहलाता है। जैसे- DOS, WINDOWS 3X,WINDOWS 95/97/98 आदि। Single User में भी आप दो तरह के OS देख सकते हो। 1. Single User Single – Task – इस OS में एक यूजर एक समय पर एक ही काम कर सकता है जैसे – Palm OS 2. Single User Multi – Tasking – इस OS में एक यूजर एक समय पर कई सारे काम कर सकता है जैसे – Windows and Mac OS

Multi-user Operating System

ऐसा OS जिसमे एक समय पर कई सारे यूजर काम कर सकते हो, वह Multi User OS कहलाता है। जैसे – Unix. इस Operating System पर एक समय में सैकड़ों उपयोगकर्ता अपना-अपना कार्य कर सकते है.

Character User Interface Operating System

इस OS को चलाने के लिए हमेशा कमांड ( Command ) टाइप करनी पड़ती है। अगर आपको किसी फाइल को खोलना हो तो उसके लिए आपको कमांड टाइप करनी पड़ेगी, जब ही वह फाइल खुलेगी। इस OS में सिर्फ कीबोर्ड ( Keyboard ) ही काम आता है। इसी के द्वारा कम्प्यूटर को कंट्रोल ( Control – नियन्त्रित ) किया जाता, माउस का इसमें कोई काम नहीं। 

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यह OS यूजर फ्रेंडली ( User Friendly ) नहीं होता है। Character ( करैक्टर – अक्षर ) पर आधारित होने के कारण ही इसे Character User Interface (CUI ) कहते है। पहले के समय में कम्प्यूटर ऐसे ही काम करते थे। अगर आप देखना चाहते हो कि पहले के समय में कम्प्यूटर कैसे काम करते थे तो आप अपने कम्प्यूटर में Run प्रोग्राम में जाकर वहाँ CMD टाइप करें और OK कर दे।

आपके सामने एक विंडो खुलेगी। पहले के समय में यहाँ पर कमांड टाइप करके ही सारे काम किये जाते थे। इस प्रकार के कम्प्यूटर को हर कोई नहीं चला सकता था। लेकिन आज GUI टाइप के कम्प्यूटर आ जाने से सभी लोगो के लिए कम्प्यूटर चलाना आसान हो गया है। CUI OS जैसे – DOS, Unix

Graphical User Interface Operating System

इस Operating System को चलाने के लिए कमाण्ड टाइप नहीं करनी पड़ती। इस OS में किसी फाइल को खोलने के लिए कमांड टाइप करने की आवशयकता नहीं होती है। बल्कि जिस फोल्डर या लोकेशन ( Location – स्थान ) में फाइल होती है उसमे माउस ( Mouse ) के द्वारा जाकर उस फाइल को खोला जा सकता है।

इस OS में कीबोर्ड और माउस दोनों का उपयोग होता है। यह OS यूजर फ्रेंडली होता है। आज लगभग सभी के पास GUI OS वाले ही कम्प्यूटर होते है, किसी – किसी के पास ही CUI OS वाले कम्प्यूटर होते है। GUI OS जैसे Windows, Linux

Batch Operating System

एक Batch Operating System में सामान कार्यों को कुछ ऑपरेटर की मदद से Batch में एक साथ समूह में रखा जाता है, और इसके बाद इन Batch को एक – एक कर के Executed किया जाता है.

माना जैसे हमारे पास 20 प्रोग्राम हैं जिन्हें Execute किया जाना है. इनमें से कुछ प्रोग्राम C++ Language में लिखे गए हैं, कुछ C Language और कुछ Java भाषा में. अब जब इन प्रोग्राम को अलग – अलग चलाते हैं तो सभी Language के लिए अलग से Compiler लोड करना होता और फिर प्रोग्राम को Execute करना होगा.

Real-Time Operating System

Real-Time Operating System उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए Input पर तुरंत प्रक्रिया करता है. Windows Operating System इसका सबसे अच्छा उदाहरण है.

Operating System कम्प्यूटर के लिए बहुत ही आवश्यक प्रोग्राम है. इसके बिना कम्प्यूटर एक निर्जीव वस्तु मात्र है, यह कहना गलत नही है. Operating System के बिना कम्प्यूटर को उपयोग करना बहुत ही कठिन कार्य साबित हो सकता है. Operating System और कम्प्यूटर के संबंधो को समझने के लिए ऊपर दिए गए आरेख को समझ सकते है.

Distributed Operating System

एक Distributed Operating System में यूजर के पास अनेक सिस्टम होते हैं और इन सभी सिस्टम के अपने Resources जैसे कि CPUमेमोरी आदि होते हैं. ये सभी सिस्टम Shared Communication Network के द्वारा आपस में जुड़े रहते हैं और प्रत्येक सिस्टम Individually अपना कार्य कर सकता है.

Distributed Operating System में रिमोट Access होता है. यानी एक यूजर दूसरे सिस्टम के डेटा को एक्सेस कर सकता है और उसके अनुसार काम कर सकता है.

Time-Sharing Operating System

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग के Operating System को Multi Tasking Operating System के नाम से भी जाना जाता है. यहाँ प्रत्येक कार्य को एक्सीक्यूट करने के लिए कुछ समय लगता है ताकि सभी कार्य सुचारू रूप से हो सकें. टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Time-Sharing Operating System) एक ही समय में एक ही कंप्यूटर सिस्टम का उपयोग करने के लिए अलग टर्मिनल (शैल) पर स्थित लोगों को सक्षम बनाता है. प्रोसेसर टाइम CPU जिसे कई यूजर के बीच शेयर किया जाता है इसे टाइम शेयरिंग कहा जाता है.

ऑपरेटिंग सिस्टम की विशेषताएँ – Advantage of Operating System in Hindi

  • यह उपयोग में आसान प्रारूप के साथ कंप्यूटर सिस्टम संसाधन प्रदान करता है
  • Primary Memory को Track करता है. जैसे, कहाँ इस्तेमाल हो रही है? कितनी मैमोरी इस्तेमाल हो रही है? और मांगने पर मैमोरी उपलब्ध करवाता है.
  • Processor का ध्यान रखता है अर्थात Manage करता हैं.
  • Simple Graphical User Interface (GUI) के साथ प्रयोग करने में आसान
  • संरक्षित और पर्यवेक्षक मोड
  • कम्प्युटर से जुडे हुए सभी डिवाइसों को मैंनेज करता हैं.
  • कम्प्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों को मैंनेज करता हैं.
  • Password तथा अन्य तकनीकों के माध्यम से सुरक्षा प्रदान करता हैं.
  • कम्प्यूटर द्वारा किये जाने वाले कार्यों का ध्यान रखता है और उनका रिकॉर्ड रखता हैं.
  • Errors पता लगाना और संभालना.
  • User और Computer Programs के बीच समन्वय बनाता हैं.
  • सिस्टम के सभी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य करता है

ऑपरेटिंग सिस्टम की | Disadvantages of Operating System in Hindi

  • यदि Operating System में कोई बड़ी और गंभीर समस्या आती है, तो आप उस स्थिति में अपने कंप्यूटर सिस्टम में रखे सभी सामग्री (Files ,Data) खो सकते हैं
  • ऑपरेटिंग सिस्टम कभी भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है क्योंकि किसी भी समय खतरा हो सकता है
  • आम आदमी के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम का सॉफ्टवेयर काफी महंगा होता है जो उन पर बोझ डालता है।
  • Operating System के लिए खतरा अधिक है क्योंकि ये ऐसे वायरस के हमलों के लिए खुले हैं। कई उपयोगकर्ता अपने सिस्टम पर Harmfull , malicious सॉफ़्टवेयर पैकेज डाउनलोड करते हैं जो Os के कामकाज को रोकता है और इसे धीमा कर देता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

दोस्तों हम उम्मीद करते है की आपको आज का हमारा यह पोस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है इसके कार्य प्रकार (Operating System in Hindi).अच्छी तरह से समज में आया होगा और मुझे यकीन है की आपको इस Article को पढ़कर काफी आसान और सरल , शब्दो में जानकारी मिली होगी.

यदि आपको हमारा यह आर्टिकल Operating System क्या होता है, ऑपरेटिंग सिस्टम का इतिहास पसंद आया है तो आप इसे अपने दोस्तों और अपने सोशल मीडिया पर शेयर जरुर करे. जिससे वह लोग भी इस जानकारी का फायदा उठा सके और यह जान सके धनयवाद. 

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