राम नवमी निबंध | ram navami nibandha in hindi | Essay on Ram Navami | ram navami 2021

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इस पोस्ट राम नवमी पर निबंध, Essay On Ram Navami, के माधयम से हम आज जानेगे भगवन श्री राम से जुडी सम्पूर्ण जानकारियों के बारे में श्री राम जी के सम्पूर्ण जीवन के बारे में 14 वर्ष की वनवास, अयोध्या, दीपावली क्यों मनाई जाती है | राम किसके अवतार है, त्योहार का इतिहास, महत्व और उत्सव के विषय में पूरी जानकारी दी गई है।

Ram Navami Nibandha In Hindi
Ram Navami Nibandha In Hindi

राम नवमी पर निबंध | Essay on Ram Navami Festival in Hindi

हिंदी धर्म में सबसे बड़े त्यौहार में से एक Ram Navami है | जो भगवान श्री राम जी जन्मोउत्सव Ram Navami Festival पर सम्पूर्ण भारत वर्ष मैं बड़े ही धूम धाम के साथ मनाया जाता है | भगवान श्री राम विष्णु जी के 10 अवतारों में से 7वां अवतार माना जाता है। धरती पर असुरों का संहार करने के लिए भगवान विष्णु ने त्रेतायुग में श्रीराम के रूप में मानव अवतार लिया था। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम राम भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने जीवनकाल में कई कष्ट सहते हुए भी मर्यादित जीवन का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विपरीत परिस्थियों में भी अपने आदर्शों को नहीं त्यागा और मर्यादा में रहते हुए जीवन व्यतीत किया। इसलिए उन्हें उत्तम पुरुष का स्थान दिया गया है।

रामनवमी क्यों ? और कब मनाया जाता है

हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन रामनवमी का त्योहार मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को रामजन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। राम जी के जन्म पर्व के कारण ही इस तिथि को रामनवमी कहा जाता है।

रामनवमी का इतिहास | ram navami history in hindi

रामायण एक पवित्र हिन्दू धर्म ग्रन्थ है जिसे महर्षि वाल्मीकि जी ने अपने जीवन कल में लिखी थी। रामनवमी का इतिहास Ram Navami History In Hind की कहानी अयोध्या के राजा दशरथ और उनके पुत्र राम की कहानी है। त्रेता युग में अयोध्या के एक महान राजा थे जिनका नाम था दशरथ, उनकी 3 पत्नियां थीं – कौशल्या, सुमित्रा, और कैकेयी। उनकी कोई संतान नहीं थी इसलिए उन्होंने ऋषि वशिष्ठ के पास संतान सुख का रास्ता पुछा।

ऋषि वशिस्ठ ने उन्हें संतान प्राप्ति के लिए पुत्र कामेष्टि यज्ञ करवाने का रास्ता बताया जिसे राजा को पुत्र प्राप्ति हो जाए । उसके बाद राजा दशरथ ने महर्षि ऋष्यस्रिंग को यज्ञ करने के लिए आमंत्रित किया। यज्ञ के बाद उन्हें यज्ञनेश्वर ने प्रकट होकर एक खीर से भरा कटोरा दिया और दशरथ को उनकी पत्नीयीं को खिलाने के लिए देने को कहा।

उनके आशीर्वाद से नवमी के दिन माता कौसल्या ने श्रीराम, कैकेयी ने भरत, और सुमित्रा ने दो पुत्र लक्ष्मण और शत्रुग्न को जन्म दिया। कौशल्या के पुत्र श्री राम, भगवान विष्णु के सातवें अवतार थे जिन्होंने अधर्म को समाप्त करने के लिए पृथ्वी पर जन्म मानव रूप में जन्म लिया था।

उन्होंने ने अधर्म को पृथ्वी से हटाया अधर्म पर धर्म की जीत हुई और रावण जैसे दशअवतार असुर रावण को मार गिराया। श्री राम 14 वर्ष वनवास के पश्चात्अयोध्या लोटे जिसे वहाँ के लोग श्री राम से बहुत खुश थे। और वो उस दिन से श्री राम प्रभु के जन्म दिन को बहुत ही धूम-धाम से रामनवमी के नाम से मनाने लगे।

राम नवमी का महत्व | Importance of Ram Navami Festival

राम नवमी इस दिन विशेष रूप से भगवान राम की पूजा अर्चना और कई तरह के आयोजन कर उनके जन्म के पर्व को मनाते हैं। वैसे तो पूरे भारत में भगवान राम का जन्मदिन उत्साह के साथ मनाया जाता है लेकिन खास तौर से श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में इस पर्व को बेहद हर्षोल्ललास के साथ मनाया जाता है। रामनवमी के समय अयोध्या में भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से भक्तगणों के अलावा साधु-संन्यासी भी पहुंचते हैं और रामजन्म का उत्सव मनाते हैं |

राम नवमी व्रत, उपवास की विधि | ram navami upvas,ram navami vrat vidhi

राम नवमी व्रत, उपवास : रामनवमी के दिन आम तौर पर हिन्दू परिवारों में Ram Navami Vrat, Upvas पूजा पाठ व अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। राम जी के जन्म के समय पर उनके जन्मोत्सव का आयोजन किया जाता है और खुशियों के साथ उनका स्वागत किया जाता है।कई घरों में विशेष साज-सज्जा कर, घर को पवित्र कर कलश स्थापना की जाती है और श्रीराम जी का पूजन कर, भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। इस दिन विशेष तौर पर श्रीराम के साथ माता जानकी और लक्ष्मण जी की भी पूजा की जाती है।

श्री राम 14 वर्ष वनवास | श्री राम को 14 वर्ष का वनवास क्यों हुआ

आखिर श्री राम जी को 14 वर्ष का वनवास क्यों हुआ : माता कैकयी द्वारा राम जी के पिता महाराजा दशरथ से वरदान मांगे जाने पर, श्रीराम ने राजपाट छोड़कर 14 वर्षों के वनवास को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया और वनवास के दौरान कई असुरों समेत अहंकारी रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की। अयोध्या छोड़ते समय श्रीराम के साथ माता जानकी और भाई लक्ष्मण भी 14 वर्षों के वनवास पर गए। यही कारण है कि रामनवमी पर उनकी भी पूजा श्रीराम के साथ की जाती है।

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