दर्द भरी प्यार की कहानियां । प्यार की कहानी 2023

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दर्द भरी प्यार की कहानियां  वो दिन अभी भी याद आता है जब पापा से बहुत जिद करने के बाद ५  रूपए मांगे थे क्यूंकि क्लास में तुमने कहा था तुम्हे गोलगप्पे बहुत पसंद हैं…और मुझे तुम अच्छी लगती थीं…तुम्हारा और मेरा घर आजू बाजू था और रास्ते में ‘राजेश  गोलगप्पे वाला’ अपना ठेला लगाता था

घर जाने के दो रास्ते थे तुम दुसरे रास्ते जाती और मैं गोलगप्पे की दुकान वाले रास्ते…उस दिन बहुत खुश था…नेवी ब्लू रंग की स्कूल की पैंट की जेब में १ रुपये के पांच सिक्के खन खन करके खनक रहे थे और मैं खुद को बिल गेट्स समझ रहा था…शायद पांच रुपये मुझे पहली बार मिले थे और तुझे गोलगप्पे खिलाकर सरप्राइज भी तो देना था…

स्कूल की छुट्टी होने के बाद बड़ी हिम्मत जुटा कर तुमसे कहा- ज्योति, आज मेरे साथ मेरे रास्ते घर चलो ना? हांलाकि हम दोस्त थे पर इतने भी अच्छे नहीं कि तू मुझ पर ट्रस्ट कर लेती…’मैं नी आरी’ तूने गुस्से से कहा…’प्लीज चलो ना तुम्हे कुछ सरप्राइज देना है’…मैंने बहुत अपेक्षा से कहा…ये सुन के तू और भड़क गयी और जाने लगी क्यूंकि क्लास में मेरी इमेज बैकैत और लोफर लड़कों की थी…

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मैं जा ही रहा था तो तू आकर बोली- रुको मैं आउंगी पर तुम मुझसे ४  फीट दूर रहना….मैंने मुस्कुराते हुए कहा ठीक है…हम चलने लगे और मैं मन ही मन प्रफुल्लित हुए जा रहा ये सोचकर की तुझे तेरी मनपसंद चीज़ खिलाऊंगा और शायद इससे तेरे दिल के सागर में मेरे प्रति प्रेम की मछली गोते लगा ले…खैर गोलगप्पे की दुकान आई…मैं रुक गया…तूने जिज्ञासावस पूछा- रुके क्यूँ?

मैं- अरे! ज्योति तुम गोलगप्पे खाओगी ना .

तू- अरे वाह…. जरुर खाऊँगी.

तेरी आँखों में चमक थी.  और मेरी आत्मा को तृप्ति और अतुलनीय प्रसन्नता हो रही थी.  तब १ रुपये के ३ गोलगप्पे आते थे.

मैं- राजेश  भैय्या ज़रा पांच के गोलगप्पे खिलवा दो.

राजेश भैय्या- जी बाबू जी.  (मुझे बुलाकर कान में) गरलफ्रंड हय का?

मैं(हँसते हुए)- ना ना भैया.आप भी

राजेश  भैय्या ने गोलगप्पे में पानी डालकर तुझे पकड़ाया ही था कि तू जोर से चिल्लाई- रवि…रवि

इतने में एक स्मार्ट सा लौंडा(शायद दुसरे स्कूल का) जिसके सामने मैं वो था जैसा शक्कर के सामने गुड लाल रंग की करिज्मा से हमारी तरफ आया और बाइक रोक के बोला- ज्योति मैं तुम्हारे स्कूल से ही आ रहा हूँ. 

चलो ‘कहो ना प्यार है के दो टिकट करवाए हैं जल्दी बैठो’
‘हाय ऋतिक रोशन!!!!’ कहते हुए तू उछल पड़ी और गोलगप्पा जमीन में फेंकते हुए मुझसे बोली-सॉरी अंकित आज किसी के साथ मूवी जाना है, कभी और.

और मैं समझ गया कि ये “किसी” कौन होगा.

ये कहते हुए तू बाइक में बैठ गई और उस लौंडे से चिपक गई, उसके सीने में अपने दोनों हाथ बांधे हुए.

तू आँखों से ओझल हुए जा रही थी और मुझे बस तेरी काली जुल्फें नज़र आ रही थी.  उसी को देखता मेरे नेत्रों में कालिमा छा रही थी.

राजेश भैय्या की भी आँखे भर आईं थी और मेरे दो नैना नीर बहा रहे थे.

राजेश भैय्या- छोड़ो ना बाबू जी.  ई लड़कियां होती ही ऐसी हैं.  अईसा थोअड़े होअत है कि किसी के दिल को शीशे की तरह तोड़ दो.

ये कहकर उन्होंने कपड़ा उठाया जिससे वो पसीना पोछा करते थे और अपने आंसुओं को पोछने लगे. मैं भी रो पड़ा.

अभी १४  गोलगप्पे बचे थे और राजेश  भैय्या जिद कर रहे थे खाने की.

एक एक गोलगप्पा खाते खाते दिल फ्लैशबैक में जा रहा था.

दूसरा गोलगप्पा- तू सातवीं कक्षा में क्लास में नई नई आई थी आँखों में गाढ़ा काजल लगाकर और मेरी आगे वाली सीट में बैठ गई थी.

तीसरा गोलगप्पा- तूने सातवीं कक्षा के एनुअल फंक्शन में ‘अंखियों के झरोखे से’ गाना गाया था.

चौथा गोलगप्पा- उसी दिन की रात मेरे नयनो में तेरी छवि बस गई थी.

पांचवा गोलगप्पा- आठवी कक्षा के पहले दिन मैडम ने तुझे मेरे साथ बिठा दिया था.

छठा गोलगप्पा- मैं बहुत खुश था.  तेरे बोलों से हेड एंड शोल्डर्स शैम्पू की खुशबू आती और मैं रोज़ उस खुशबू में खो जाता. यही कारण था मैं आठवी की अर्धवार्षिक परीक्षा में अंडा लाया था. और मैडम ने मुझे हडकाया था.

सातवाँ गोलगप्पा- मैं फेल हो गया था तो मैडम ने तुझे होशियार लड़की के साथ बिठा दिया था.

आँठवा गोलगप्पा – मैं उदास हो गया था .  और मैंने ३ दिन तक खाना नहीं खाया था.

नौवा गोलगप्पा- मैं रोज़ छुट्टी के बाद तेरे घर तक तेरा पीछा किया करता था.

दसवां गोलगप्पा – मैं रोज़ सुबह और शाम तेरे घर के चक्कर काटता था इस उम्मीद की शायद तू घर कइ बाहर एक झलक मात्र के लिए ही सही दिख जाए.

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ग्यारहवां गोलगप्पा – तूने मुझे एक दिन डांट दिया था कि छुट्टी के बाद मेरा पीछा मत किया करो. और उस दिन मुझे बहुत बुरा लगा था, तबसे मैं दुसरे रास्ते से घर जाने लगा था.

बारहवां गोलगप्पा – हम नवीं कक्षा में पहुँच गए थे.  दिवाली थी.  कहो ना प्यार है के गाने रिलीज़ हो गए थे.  मैं क्लास में बैठा नेत्रों में तेरी तस्वीर लिए ‘क्यूँ चलती है पवन…. गुनगुनाते रहता था’ .

तेरहवां गोलगप्पा – मैंने दिवाली के बाद तुझसे पूछा था हिम्मत जुटाकर कि क्या तुम्हारा कोई बॉय फ्रेंड है. तुमने कहा था- नहीं मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ .

उस रात मैं बहुत खुश था ये सोचकर की तू कभी तो जानेगी कि तेरे लिए मैं भले ही कुछ भी हूँ मगर मेरे लिए तू वो है जिसके लिए मैं सांस लेता हूँ.

चौदहवां गोलगप्पा – आज कहो ना प्यार है रिलीज हुई है और मैं पापा से पांच रुपये मांगने की जिद कर रहा हूँ.  यह भी प्लान बना रहा हूँ कि तुझसे आज दिल की बात कह दूंगा.

पन्द्रहवां और आखिरी गोलगप्पा – मेरे दिल टूट चूका था और मुहं में गोलगप्पे का पानी था और चेहरे में अश्कों का.

दर्द भरी प्यार की कहानी । Emotional Pyar ki Kahani

मेरी नयी -नयी  नौकरी लगी थी और में कंप्यूटर ऑपरेटिंग की पोस्ट पे था और साथ ही साथ MBA भी कर रहा था .  ये जॉब मेरे लिए एक तरह से पार्ट टाइम जॉब ही थी

ताकि में अपना खर्च चलने के साथ-साथ फॅमिली को भी थोडा सपोर्ट कर सकूँ .  उसी ऑफिस में एक लड़की काम करती थी जिसका नाम सोम्या था .  बहुत ही सिंपल दिखती थी पर  काम में तेज थी

एक ही ऑफिस में होने की वजह से हमारी बीच बातचीत भी होने लगी और धीरे -धीरे  में उसे पसंद करने लगा इतना पसंद की मुझे लगा की मुझे सोम्या से प्यार हो गया है .  वो हमेशा ही बड़े लोगो की तरह बाते करती थी . 

जैसे  देश की हालत केसे सुधरे , गरीब लोगो की हेल्प केसे की जाए वगैरह वगैरह  और अपने काम के प्रति  बहुत ही जिम्मेदार थी .   ५- ६  महीनो में हम बहुत ही अच्छे दोस्त हो गए थे .  वो अपनी बाते मुझसे शेयर करती और में अपनी उससे .  एक बार मेने उससे पुछा था की तुम केसे लड़के से शादी करोगी . 

उसने कहा मुझे ऐसा लड़का चाहिए जो एक अच्छा इंसान हो , मेहनत और लगन में विश्वास रखता हो , और हमेशा दूसरो के काम आये .  उसकी डिमांड तो बहुत बड़ी थी आजकल के वक़्त के हिसाब से पर मुझे उससे बहुत प्यार हो गया था और शादी उससे ही करनी थी तो में भी उसी तरह का इंसान बनने की कोशिश में लग गया .

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एक दिन उसने बात करते समय मुझसे कहा की वो अगले हफ्ते ये नौकरी छोडके  किसी समाजसेवी संस्था में जुड़ने वाली है.  मुझे सुनने मे तो अच्छा लगा पर  बहुत निराश हो गया लगा जैसे कोई अपना हमेश के लिए छोड़ के जाने वाला हो , तो एक आकिरी मोका समझ के मेने उससे अपने प्यार का इज़हार कर दिया मेने कहा , की में पूरी ज़िन्दगी तुम्हारा हर कदम पे साथ दूंगा और जैसा लड़का तुम्हे चाहिए वैसा ही बनूँगा, जो कहोगी वोही करूँगा बस तुम मुझसे शादी कर लो .

उसने कहा की मैं  वैसे तो में भी तुम्हे पसंद करती हूँ ……. पर शादी के बारे में मेने कुछ सोचा नहीं .  मेने कहा तो तुम २-३ दिन का समय ले लो सोचने के लिए , क्योंकि ये तुम्हारी ज़िन्दगी है .  उसने कहा ठीक है . 

अगले दिन ही वो मेरे पास आई और बोली २ मिनट बात करनी है और उसने मुझे बताया की उसने अपने मम्मी- पापा से बात करी थी . उन्होंने कहा की वो पहले अपने मम्मी – पापा से पूछले फिर अपने पेरेंट्स के साथ  तुम्हे घर पे बुलाया है .  में ख़ुशी के मारे उछल  पड़ा और पुछा  तुम्हे क्या लगता है बात बनेगी उसने कहा ९९ % बनेगी मेरे ख्याल से .

मैंने   कहा ठीक हे मम्मी-पापा को तो में राज़ी कर लूँगा , तुम बस एक अच्छी से चाय और पकोड़े बना देना जिसे खाते ही मेरे मम्मी-पापा तुम्हे टेस्ट में पास कर दे.   उसने मुझे अपने घर का पता दिया और फ़ोन नंबर तो मेरे पास था ही .

अगले दिन मेने मम्मी -पापा से बात की और सौम्या के बारे में बताते हुए उसकी तारीफ़ के फूल झाड दिए.   पापा ने कहा कल चलेंगे मैंने  कहा ठीक है .  मैंने  सोचा की सौम्या  को फ़ोन करके बता देता हूँ  की मम्मी – पापा कल तुम्हारे घर पे आ रहे है .  पर उसका फ़ोन स्विच ऑफ जा रहा था.

 मुझे लगा छुट्टी होने की वजह से उसका फ़ोन बंद है .  फिर जब मेने शाम को उसका नंबर मिलाया तो भी स्विच ऑफ जा रहा था मुझे लगा कुछ गड़बड़ है , तो में तुर्रंत अपनी बाइक लेके उसके घर की तरफ चल दिया .

जेसे ही में उसके घर पहुंचा तो देखा घर के बहार भीड़ लगी हुई थी और अंदर से किसी के रोने की आवाज आ रही थी पूछने पैर पता लगा की रात को नौकरी से आते हुए एक ट्रक वाले ने उसे कुचल दिया .

ट्रक चलाने  वाला दारु पीकर  ट्रक चला रहा था जिससे उसका बैलेंस बिगड़ गया और उसने रोड के साइड में  जेब्रा क्रासिंग  पर ही ट्रक दे मारा .  ट्रक वाले को पुलिस की हिरासत में लिया जा चूका था . 

मेरे तो मानो पैर से जमीन ही खिसक गयी हो .  फिर मेने खुद को संभाला और अंदर जाके सौम्या  के मम्मी  और पापा को संभाला . सौम्या   ने कभी बताया नहीं था की उसके कोई भाई -बहन नहीं है .

वो किराए के मकान में रहती थी और पूरे घर का खर्च वो ही चलाती थी .  यह  सुनके तो में भी अपने होश खो बैठा और कोने में बैठके रोने लगा .  पर फिर मेने घर पे फ़ोन किया और मम्मी-पापा को इसके बारे में बताया और सौम्या  के मम्मी- पापा को भी अपने घर पर लेकर  आ गया.

उन्होंने काफी मन किया पैर मेने एक ना सुनी . मेरे मम्मी-पापा ने भी मुझे शाबाशी दी और कहा तुम्हारे जैसे  लड़के को बेटे के रूप में पाकर   हमे अपने आप पे गर्व हो रहा है , और तुम अब पहले से कही ज्यादा बदल गए हो और तुम्हारा सौम्या  के मम्मी -पापा को घर लाने का फेसला बहुत सही था. 

तो मैंने  ज्यादा कुछ न बोलके ये ही कहा की मैंने यह   इसीलिए किया क्योंकि मैंने सौम्या से वादा किया था कि में एक अच्छा इंसान बनके दिखाऊंगा  और यह मैंने किया क्योंकि “शायद मेरी सौम्या  भी ऐसा ही करती , जो अब मेरे दिल में यादो की तस्वीर बनके हमेशा रहेगी” .

उसके बाद में भी अपनी नौकरी छोडकर समाजसेवा संस्था से जुड़ गया और आज उस बात को ४ साल हो गए है . मेरी शादी हो चुकी है और २ बच्चे है मेरी पत्नी भी एक समाजसेवी है.

मैंने   उसे सौम्या  के बारे में सब बता रखा है  और आज में खुद पर गर्व करता हूँ और भगवान् का शुक्रिया  करता हूँ  की उन्होंने मुझे सौम्या  जैसी लड़की से मिलाया और इस समाजसेवा के पथ पर चलने की शक्ति दी.

और भगवान् से ये ही दुआ करता हूँ की अगले जनम में सौम्या   मुझे दोबारा मिल जाए और फिर जन्मो-जन्मों  तक जुदा न हो.  जन्मो -जन्मो तक जुदा न हो.

आखिर वह मुझे नहीं मिली सैड लव स्टोरी हिंदी

आखिर वह मुझे नहीं मिली sad love हेलो दोस्तों मेरा नाम राहुल सक्सेना है. आज मैं आपको अपनी सच्ची लव स्टोरी बताने जा रहा हूँ, लेकिन दर्द इस बात का है की यह लव स्टोरी अपनी पूर्णता को प्राप्त नहीं हो सकी.

आखिर वह मुझे नहीं मिली sad love मित्रों आज मैं करीब एक साल से इस दर्द को खुद में ही छुपा कर रखा था, लेकिन अब इसे सहा नहीं जाता . अन्दर ही अन्दर बहुत घुटन सी होने लगी है, तो मैंने सोचा की क्यों ना इस दर्द को बाहर निकाल दिया जाए. मुझे पता है कि इस दर्द के बाहर आने पर मेरी जिंदगी में एक बार फिर से भूचाल आने वाला है, लेकिन अगर यह दर्द बाहर नहीं आया तो मेरे अन्दर का भूचाल मुझे खत्म ही कर देगा.

दोस्तों बात तब की है जब मैं कालेज में पढाई करता था. वहाँ एक लड़की थी रेशमा…..रेशमा चौधरी. बला की खुबसूरत….कजरारे नैन….लाल सुर्ख होंठ….गोरा रंग….अरे लड़की क्यों अप्सरा कहना चाहिए था.

दोस्तों मुझे उस लड़की से पहली ही नजर में प्यार हो गया था. लेकिन मुझे हमेशा इस बात का दर था की कहीं यह प्यार एकतरफा तो नहीं है ना. मैं हमेशा से ही भगवान से इस बात की प्राथना करता था की यह प्यार एकतरफा ना हो.

मुझे भगवान ने वह समय दे ही दिया जब मैं इस बात को जांच लूँ की यह प्रेम एकतरफा है की नहीं. एक दिन कॉलेज की छुट्टी के बाद जब मैं घर जा रहा था तो देखा की रेशमा की साइकिल खराब हो गयी थी. वह साइकिल को एक आम के पेड़ के निचे खड़ी करके उसे बनाने की कोशिश कर रही थी और वह साईकिल बन नहीं रही थी.

दरअसल में उसका दुपट्टा साइकिल के चैन में फंस गया था. मैंने जब यह देखा तो मैं वहीँ रुक गया और उसकी हेल्प की…उसके बाद हम साथ में ही अपने – अपने घर गए. रास्ते में हमने एक दुसरे के बारी काफी कुछ जाना…..धीरे धीरे हमारी दोस्ती परवान चढने लगी.

एक दिन मौक़ा देखकर मैंने उसे प्रपोज कर दिया. उसने उसी पल हाँ कह दिया. यह मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं था. मैं उस दिन बहुत खुश था. लेकिन शायद यह ख़ुशी ज्यादा दिनों तक नहीं रहने वाली थी.

एक्जाम का समय आने वाला था. हम लोग बहुत मेहनत से पढ़ाई में लग गए. अब मेरा लक्ष्य अच्छे नम्बर्स लाकर रेशमा को और अधिक खुश करना था. एक्जाम्स खत्म हो गए. रिजल्ट के दिन आ गए, लेकिन मुझे क्या पता था की आज के दिन दो दो परिणाम आने वाले हैं एक मेरे पढाई के और एक मेरे प्रेम के…..

मेरी नजर रेशमा को ही धुंढ रही थी.लेकिन रेशमा कहीं दिखाई नहीं दे रही थी. तभी राजू ने बताया की जाकर नम्बर्स ले ले……जब मैंने रिजल्ट लियए तो देखा की ९८% मार्क्स आये हैं.मैं बहुत ही खुश हो गया कि पहली परीक्षा में तो मैं पास हो गया अब दूसरी परीक्षा में भी अवश्य ही पास हो जाऊँगा. अब मेरी नजर और भी बेसब्री से रेशमा की राह ताकने लगीं.

तभी मैंने देखा की रेशमा एक हैंडसम शहरी लडके के साथ कार से उतरी…मैं यह देख कर हैरान हो गया की किस तरह वह लड़का उसकी बाहों में हाथ डालकर उससे बातें कर रहा था…उसके बिखरे हुए बालों को संवार रहा था

मैं दौड़कर रेशमा के पास गया, लेकिन रेशमा ने मुझे इग्नोर कर दिया…अब मुझे गहरा धक्का लगा….मैं तेजी सी उसके पास पहुंचा और उसका हाथ पकड़ कर बोला कौन है यह लड़का…..मेरा गुस्सा उस समय सातवें आसमान पर था.

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बेहतरीन लव शायरी

क्या बेहूदगी है…हाथ छोड़…उस लडके ने कहा…

तू बीच में मत आ….यह हमारे बीच का मामला है….और तू है भी कौन..

इसके पहले की वह लड़का कुछ जवाब दे….रेशमा नी कहा की यह हेमंत है…..मेरा मंगेतर

और मैं…मैने पूछा

तू…तू मेरा…….टाईमपास और दोनों हंसने लगे….

मैं वहीँ बैठ गया……ऐसा लग रहा था की पूरा आसमान मेरे ऊपर गिर पडा हो..धरती में मेरे पैर जकड गए हों..किसी तरह से मेरे दोस्तों ने मुझे मेरे घर पहुंचाया और वहाँ कहा की इसकी तबिय्यत अचानक से खराब हो गयी थी.

और उसव दिन के बाद सी मैं कुछ भी ठीक ढंग से नहीं कर पा रहा हूँ…ना ही खाने में मन लगता है….न ही कुछ करने में…..दोस्तों से पता चला की वह फेल हो गयी थी….तो भी इस दिल को उसके फेल होने का दर्द हुआ

उस दिल को जिसे उसने ठुकरा दिया है….खैर दोस्तों मैंने आज इस पोस्ट आखिर वह मुझे नहीं मिली sad love के माध्यम से अपना सारा दर्द निकाल दिया है….मैं अब शायद फिर से वही राहुल सक्सेना बन पाउँगा जो पहले था…..धन्यवाद

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