chhattisgarh ka prachin itihas in hindi | छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास

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छत्तीसगढ़ का इतिहास अपने आप के बहुत बड़ा महत्त्व रखता है छत्तीसगढ़ दक्षिण कोसल का इतिहास बहुत ही प्राचीन है।

छत्तीसगढ़ का गठन 1 नवम्बर, 2000 को पूर्वी मध्य प्रदेश के छत्तीसगढ़ी भाषा बोलने वाले 16 जिलों को अलग कर किया गया था। यह मध्य भारत में स्थित है और क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का दसवां सबसे बड़ा राज्य है जिसका क्षेत्रफल 136,904 वर्ग किमी. (52,199 वर्ग मील) है।

जनसंख्या की दृष्टि से यह भारत का सोलहवां सबसे बड़ा राज्य है जिसकी कुल जनसंख्या 2.5 करोड़ है। यह लौह अयस्क व विद्युत् उत्पादन के मामले में भारत के अग्रणी राज्यों में से एक है इसकी गणना भारत के सबसे तेजी से विकसित हो रहे राज्यों में की जाती है।

भारत में दो क्षेत्र ऐसे हैं जिनका नाम विशेष कारणों से बदल गया – एक तो ‘मगध’ जो बौद्ध विहारों की अधिकता के कारण “बिहार” बन गया और दूसरा ‘दक्षिण कौशल’ जो छत्तीस गढ़ों को अपने में समाहित रखने के कारण “छत्तीसगढ़” बन गया। किन्तु ये दोनों ही क्षेत्र अत्यन्त प्राचीन

काल से ही भारत को गौरवान्वित करते रहे हैं। “छत्तीसगढ़” तो वैदिक और पौराणिक काल से ही विभिन्न संस्कृतियों के विकास का केन्द्र रहा है। यहाँ के प्राचीन मन्दिर तथा उनके भग्नावशेष इंगित करते हैं कि यहाँ पर वैष्णव, शैव, शाक्त, बौद्ध संस्कृतियों का विभिन्न कालों में प्रभाव रहा है

इसके प्रागौतिहासिक काल को  पहले पंडित लोचन प्रसाद पांडेय ने “मानव जाती की सभ्यता का जन्म स्थान माना है ”  इसका प्रमाण प्राचीनतम आदिवासी क्षेत्र जो की रायगढ़ जिले की सिंघनपुर , कबरापहाड ,खैरपुर ,तथा कर्मगढ़ है यहाँ के गुफाओ एवं शैल चित्रों के रूप में अपना

प्राचीनतम स्मृति का ज्ञान कराती है।  यहाँ की गुफाओ में उकेरे गए शैल चिंत्रो की खोज  सबसे पहले खोज इंजिनियर अमरनाथ दत्त ने  1910 किया था  सिंघनपुरी की गुफाओ में लालरंग से पशुओ और सरीसृपों तथा टोटेमवादी  चिन्हो का रूपांकन है जिसमे मनुष्य के चिंत्रों को  रेेेखा के द्वारा खिंच कर बनाया गया है।

● एक चित्र में व्यक्तियों के समूह को हाथ में लाठिया और मुकदर लिए हुए एक बड़ा पशु का पीछा करते दिखया गया। 

● पर्सीब्राउन  अनुसार  “चित्र अत्यंत प्राचीन काल के है और इनमे कुछ चित्र लिपियाँ अंकित है “

● हेडन  यहाँ प्राप्त कतिपय अपखंडित अकीक शल्कों को आरम्भिक पाषाण युग के पुरापाषाण युगीन औजार कहा है इसके अतिरिक्त एडरसन द्वारा खोजा गया हेमेटाइट पेसल (मुशल )की तुलना मोहनजोदड़ो से प्राप्त बेलनाकार हेमेटाइट से की जाती है

● सिंघपुर के चित्र शैली की स्पेन की कतिपय गुफाचित्रों से  विलक्षण मेल खाती है।  परतु उसमे ईऑस्ट्रेलिया  चित्रों से भी सादृश्य दिखाई पड़ती है।

● बेलपहाड़ स्टेशन  (सम्बलपुर उड़ीसा ) यहाँ पार विक्रम खोल नमक पहाड़ी पर खुदे हुए शिलालेख का पंडित लोचन प्रसाद पण्डे ने सबसे पहले पता लगाया था जिसे पुरतात्विक विद्वान् श्री काशीप्रसाद जायसवाल ने इसका समय ईसा पूर्व. 4000 से 7000 वर्ष ठहराया  . उसके अनुशार उसकी लिपि मोहनजोदड़ो की लिपि और ब्राम्ही लिपि के बिच की लिपि मानी  गयी है विद्वानों के अनुसार ब्राम्ही लिपि फोनिशियन और यूरोपियन की जननी है इससे महाकोशल की प्रागैतिहासिक सभ्यता पर प्रकाश पड़ता है।

● रायगढ़ सिंघनपुर के चित्रित गह्वरों की खोज करते समय रायबहादुर श्री मनोरंजन घोस को 5 पूर्वपाषाण काल की कुल्हाड़ी प्राप्त हुआ।

● चितवाडोंगरी राजनांदगाव में बघेल और रमेन्द्रनाथ  मिस्र को भूरे रंग से चित्रांकित नए शैलचित्र की खोज किया गया जिसमे मानव आकृति और पशु एवं अन्य रेखांकन है।

● छत्तीसगढ़ के  महापाषाण युग  के स्मारक दुर्ग ,रायपुर , सिवनी , रीवा ,जिले में पाए गए है।  दुर्ग जिले में स्थित धनोरा में एक स्थान पर 500 महापाषाणिक स्मारक मिले है। जिन्हे 4 वर्गों में विभाजन कियागया  है।  1956 -57 में  यहाँ प्रथम वर्ग के तीन तथा दूसरे वर्ग के एक स्मारक की उत्खनन किया गया।

● ताम्रयुगीन   सभ्यता के अवशेष छत्तीसगढ़ में प्राप्त हुए है। दुर्ग जिले के धनोरा गावं में ताम्रयुगीन अवशेष प्राप्त हुए है दुर्ग जिले केहि सोरर ,चिरहरि और कबराहाट में भी ताम्रयुगीन निर्मित आवास का पता चला है  धमतरी से बालोद मार्ग के कईगांवों में ताम्रयुगीन शव स्थान मिले है।

● डॉ. मोरेश्वर गंगाधर दीक्षित ने इन स्थानों का सर्वेक्षण एवं उत्खनन कार्यप्रारम्भ का प्रयास किया था।

● पूर्वपाषाण एवं उत्तर पाषाण काल के अवशेष छत्तीसगढ़ की सीमा के आसपास के क्षेत्रों में मिले है।  नर्मदाघाटी , बैनगंगा घाटी में अवशेष मिले है। रायगढ़ जिले के सिंघनपुर में पांच कुल्हाड़ी मिले है।

● उत्तरपाषाण काल के कराघातक हथौड़ा प्राप्त हुआ जो की उत्तरपाषाण काल का महत्वपूर्ण औजार मानाजाता है जो की नांद गॉंव के अर्जुनी के पास बोन टीला से प्राप्त हुआ है।

● वृहत्पाषाण काल दुर्ग में शव स्थान मिले है पुरतात्विक विभाग और इतिहास विभाग रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय द्वारा प्रो. काम्बले के सर्वेक्षण दाल को तीर फलक  प्राप्त हुआ जो की महंत  घासीदास संग्रहालय रायपुर में रखा गया है।

पूर्व वैदिक कालीन | छत्तीसगढ़ का इतिहास

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh Ka Prachin Itihas) की सांस्कृतिक विरासत रामायण और महाभारत यानी महाकाव्य काल की अवधि थी ।

रामायण की कहानी कोशल के इक्ष्वाकु वंश के चारों ओर एवं महाभारत की कहानी हस्तीनापुर के ‘ कुरु ‘ राजवंश के चारों ओर घूमती है  स्थानीय लोग दृढ़ता से मानते हैं कि रामायण के लेखक वाल्मीकि के आश्रम ब्रह्मव्रत ( कानपुर जिले के विथुर ) में थे और यह नैमिशारनी ( सीतापुर जिले में निसार – मिश्रीख ) के आसपास था , जिसमें सुता ने महाभारत की कहानी सुनाई थी जिसे व्यासजी से सुना था ।

इस राज्य में कुछ स्मृतियाँ और पुराण भी लिखे गए थे  गौतम बुद्ध , महावीर , मखलिपुट्टा गोशाल और महान विचारकों ने छठीं शताब्दी ईसा पूर्व में छत्तीसगढ़ में एक क्रांति लाए  इनमें से मखलिपुट्टा गोशाल , जो श्रावस्ती के पास श्रवण में पैदा हुए थे , अजीविका संप्रदाय के संस्थापक थे  ।

वास्तव में , भगवान महावीर के आगमन से पहले भी जैन धर्म इस राज्य में मौजूद था  विश्वनाथ , साम्भरनाथ और चंद्रप्रभा जैसे कई तीर्थकर इस राज्य के विभिन्न शहरों में पैदा हुए थे और यहां ‘ कैवल्य ‘ प्राप्त किए थे  ।

जैन धर्म ने बाद में भी इस राज्य में अपनी लोकप्रियता बरकरार रखी  यह तथ्य कई प्राचीन मंदिरों के खंडहरों , इमारतें , इत्यादि द्वारा प्राप्त हुआ है  एक शानदार जैन स्तूप के अवशेष मथुरा में कंकली टिला के पास प्राप्त किए गए हैं , जबकि जैन मंदिरों में शुरुआती मध्य युग में बनाया गया है , फिर भी देवगढ़ , चंदेरी और अन्य स्थानों में संरक्षित हैं

रामायण कालीन छत्तीसगढ़ का इतिहास

●छत्तीसगढ़ का इतिहास बस्तर रामायण काल से जुड़े हुए है इस काल मै छत्तीसगढ़ दक्षिण कोसल का भाग था। इसकी राजधानी कुशस्थली थी

●भानुमंत की पुत्री कौशल्या का विवाह राजा दशरथ से हुआ।

●रामायण के अनुसार राम अपना अधिकांश समय छत्तीसगढ़ के सरगुजा के रामगढ की पहाड़ी,सीताबेंगरा की गुफा तथा लक्षमनबेंगरा की गुफा की में ब्यतीत किये थे |

● खरौद मै खरदूषण का साम्राज्य था।

● बारनवापारा (बलौदाबाजार) मै ‘तुरतुरिया’ बाल्मीकि आश्रम जहां लव – कुश का जन्म हुआ था।

● सिहावा में श्रींगी ऋषि का आश्रम था। लव- कुश का जन्म स्थल मना जाता है।

शिवरीनारायण में साबरी जी ने श्रीराम जी को झूठे बेर खिलाये थे ।

● रामायण कालीन बस्तर का विवरण पंचवटी से सीता माता का अपहरण होने की मान्यता है ।

● रामजी के पस्चात कोशल राज्य दो भागों मै बटा १.उत्तर कोशल-कुश का साम्राज्य, २.दक्षिण कोशल- वर्तमान छत्तीसगढ़

महाभारत कालीन अनुसार छत्तीसगढ़ का इतिहास

महाभारत महाकाव्य के अनुसार छत्तीसगढ़ प्राककोशल भाग था।अर्जुन की पत्नी चित्रांगदा सिरपुर की राजकुमारी थी और अर्जुन पुत्र बभ्रुवाहन की राजधानी सिरपुर था।

● मान्यता है कि महाभारत युद्ध में मोरध्वज और ताम्रध्वज ने भाग लिए थे।

●इसी काल में ऋषभ तीर्थ गुंजी जांजगीर-चाँपा आया था।

●इस काल की अन्य बातें:-

●सिरपुर –चित्रांगतपुर के नाम से जाना जाता है।

● रतनपुर को मणिपुर(ताम्रध्वज की राजधानी)

● खल्लारी को खल्वाटिका कहा जाता है , मान्यता है कि महाभारत का लाक्षागृह कांड यही हुआ था।भीम के पद चिन्ह (भीम खोह) का प्रमाण यही मिलता है ।

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