बेटी बचाओ बेटी पढाओ हिंदी निबंध | कन्या भ्रूण हत्या पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ निबंध हिंदी में

Beti bachao Beti Padhao Nibandh in hindi – बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ निबंध

Beti bachao Beti Padhao Nibandh introduction

श्लोक :- यत्र नार्यस्तु पुजयन्ते रमन्ते तत्र देवता अर्थात जहाँ स्त्रियों का  सम्मान किया जाता है,
 वहाँ साक्षात् देवता निवास करते हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ निबंध : भारत एक महान कृषि प्रधान देश जिसे धान का कटोरा कहा गया है | जहाँ स्त्री के मुकाबले पुरुषो को अधिक महत्व दिया जाता है | जहां बेटियों को पुरुष सामान दर्ज ,शिक्षा नहीं दिया जाता क्योंकि वहा एक बेटी है हमरे देश में कुछ मंद बुद्धि लोगो के कारन सदियों से बेटियों को उनको अपने अधिकार से वांछित रही है | जबकि बेटियां बेटों से अधिक सक्षम व बौद्धिक क्षमता वाली होती है | पुरुष वर्ग यहाँ जानते हुए भी बेटियों के साथ भेदभाव करते है की उनका अस्तित्व भी एक बेटी के कारन है | फिर भी ये पुरुष वर्ग समाज बेटियों को न अपना कर बेटों को अधिक महत्व देते है | उसी की कामना करते है परन्तु आज बेटी हर एक छेत्र में बेटों से कम नहीं है , पुरुष के बराबर बेटियां उनके सामान कदम से कदम मिलाये देश के Nasa जैसे कई महान कार्य के लिए अपना योगदान दे रही है

सरकार द्वारा भारत देश में बेटियों के दुर्दश उन पर हो रहे शोषण, अत्याचार को देखते हुए भारत की हर बेटियों का भविष्य उज्जवल बनाने के उद्देश्य से समय-समय पर कई सारी योजनाएं की शुरुयात की जाती है |

जिसमें से एक है ”बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना ” [ beti bachao beti padhao yojana ] जिसके अंतर्गत भारत देश में हो रहे कुकृत्य सबसे भयानक अपराध कन्या भ्रूण हत्या है जिसमें अल्ट्रासाउंड के माध्यम से लिंग परीक्षण के बाद लड़कियों को माँ के गर्भ में ही मार दिया जाता है | बेटी बचाओ अभियान सरकार द्वारा स्त्री भ्रूण के लिंग-चयनात्मक गर्भपात के साथ ही बालिकाओं के खिलाफ, बेटियों के जन्मदर में लगातार घटती संख्या को संतुलित करने, उनके शिक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए व अन्य अपराधों को समाप्त करने के लिए शुरु किया गया है। जिसके अंतर्गत कन्या भ्रूण हत्या, को भारत मैं अपराध और अल्ट्रासाउंड, आदि को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया |

जिसकी शुरुआत देश के यशश्शवी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 जनवरी 2015 को आरंभ किया गया | इसके अंतर्गत हमने आपके लिए बहुत सी जानकारियां उपलब्ध कराई है जैसे :- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध हिंदी में , Beti bachao Beti Padhao Nibandh in hindi बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, जैसे महत्वपूर्ण जानकारियों के माध्यम से आप बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ निबंध  के द्वारा अच्छे से समझ सकते है |

Beti bachao Beti Padhao Nibandh in hindi

Beti Bachao Beti Padhao Nibandh In Hindi
Beti Bachao Beti Padhao Nibandh In Hindi

बचाओ बेटी पढ़ाओ निबंध हिंदी में

पृथ्वी पर मानव जाति का अस्तित्व, नारी और नर अर्थात स्त्री और पुरुष दोनों की समान भागीदारी के बिना संभव नहीं होता है। दोनों ही पृथ्वी पर मानव जाति के अस्तित्व के साथ-साथ किसी भी देश के विकास के लिए समान रूप से जिम्मेदार है। महिलाएं पुरुषों से अधिक महत्वपूर्ण होती हैं क्योंकि महिलाओं के बिना मानव जाति की निरंतरता के बारे में कल्पना भी नहीं की जा सकती हैं क्योंकि महिलाएं ही मानव को जन्म देती हैं।

लडकियाँ प्राचीनकाल से भारत में बहुत प्रकार के अपराधों से पीड़ित हैं। सबसे बड़ा अपराध कन्या भ्रूण हत्या है जिसमें अल्ट्रासाउंड के माध्यम से लिंग परीक्षण के बाद लडकियों को माँ के गर्भ में ही मार दिया जाता है। बेटी बचाओ अभियान को सरकार द्वारा कन्या भ्रूण हत्या के साथ-साथ बालिकाओं के विरुद्ध अन्य अपराधों को समाप्त करने के लिए शुरू किया गया है।

भारत प्रत्येक क्षेत्र में वृद्धि करता हुआ देश है। यह आर्थिक, शोध, तकनीकी और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से बढ़ता देश है। यहाँ तक कि देश में इस तरह के विकास की प्रगति के बाद भी, लड़कियों के खिलाफ हिंसा आज भी व्यवहार में है। इसकी जड़े इतनी गहराई में हैं, जो समाज से पूरी तरह बाहर किये जाने में बाधा उत्पन्न कर रही है। लड़कियों के खिलाफ हिंसा बहुत ही खतरनाक सामाजिक बुराई है। कन्या भ्रूण हत्या का मुख्य कारण देश में तकनीकी सुधार जैसे; अल्ट्रासाउंड, लिंग परीक्षण, स्कैन परीक्षण और उल्ववेधन, आनुवंशिक असामान्यताओं का पता लगाना, आदि है। इस तरह की तकनीकी ने सभी अमीर, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को भ्रूण के परीक्षण का रास्ता प्रदान किया है और लड़की होने की स्थिति में गर्भपात करा दिया जाता है।

सबसे पहले उल्वेधन (एम्निओसेंटेसिस) का प्रयोग (1974 में शुरु किया गया था) भ्रूण के विकास में असमानताओं का परीक्षण करने के लिए किया जाता था हालांकि, बाद में बच्चे के लिंग (1979 में अमृतसर, पंजाब में शुरु किया गया) का पता लगाने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाने लगा। जबकि, यह भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा निषिद्ध किया गया था, लेकिन यह निषिद्ध होने से पहले ही बहुत सी लड़कियों को जन्म से पहले नष्ट कर चुका था। जैसे ही इस परीक्षण के फायदे लीक हुये, लोगों ने इसे अपनी केवल लड़का पाने की चाह को पूरा करने और अजन्मी लड़कियों को गर्भपात के माध्यम से नष्ट करने के द्वारा प्रयोग करना शुरु कर दिया।

यह बहुत स्पष्ट है कि, एक लड़की हमेशा समाज के लिए आशीर्वाद रही है और इस संसार में जीवन की निरंतरता का कारण है। हम बहुत से त्योहारों पर विभिन्न देवियों की पूजा करते हैं जबकि, अपने घरों में रह रही महिलाओं के लिए थोड़ी सी भी दया महसूस नहीं करते। वास्तव में, लड़कियाँ समाज का आधार स्तम्भ होती हैं। एक छोटी बच्ची, एक बहुत अच्छी बेटी, बहन, पत्नी, माँ, और भविष्य में और भी अच्छे रिश्तों का आधार बन सकती है। यदि हम उसे जन्म लेने से पहले ही मार देंगे या जन्म लेने के बाद उसकी देखभाल नहीं करेंगे तब हम कैसे भविष्य में एक बेटी, बहन, पत्नी या माँ को प्राप्त कर सकेंगे। क्या हम में से किसी ने कभी सोचा है कि क्या होगा यदि महिला गर्भवती होने, बच्चे पैदा करने या मातृत्व की सभी जिम्मेदारियों को निभाने से इंकार कर दे। क्या आदमी इस तरह की सभी जिम्मेदारियों को अकेला पूरा करने में सक्षम है। यदि नहीं; तो लड़कियाँ क्यों मारी जाती हैं?, क्यों उन्हें एक शाप की तरह समझा जाता है, क्यों वो अपने माता-पिता या समाज पर बोझ हैं? लड़कियों के बारे में बहुत से आश्चर्यजनक सत्य और तथ्य जानने के बाद भी लोगों की आँखें क्यों नहीं खुल रही हैं।

आजकल, महिलाएं घर के बाहर मैदानों में आदमी से कंधे से कंधे मिलाकर घर की सभी जिम्मेदारियों के साथ काम कर रही हैं। यह हमारे लिए बहुत शर्मनाक है कि आज भी लड़कियाँ बहुत सी हिंसा का शिकार हैं, जबकि तब उन्होंने अपने आपको इस आधुनिक युग में जीने के लिए ढाल लिया है। हमें समाज में पुरुष प्रधान प्रकृति को हटाते हुये कन्या बचाओ अभियान में सक्रियता से भाग लेना चाहिये। भारत में, पुरुष स्वंय को शासन करने वाला और महिलाओं से बेहतर मानते हैं, जो लड़कियों के खिलाफ सभी प्रकार की हिंसा को जन्म देता है। कन्या को बचाने के लिए माता-पिता की सोच बदलना ही पहली जरुरत है। उन्हें अपनी बेटियों के पोषण, शिक्षा, जीवन शैली, आदि की उपेक्षा रोकने की जरूरत है। उन्हें अपने बच्चों को एक समान मानना चाहिये चाहे वो बेटी हो या बेटा। यह माता-पिता की लड़की के लिए सकारात्मक सोच ही है जो भारत में पूरे समाज को बदल सकती है। उन्हें उन अपराधी डॉक्टरों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिये जो कुछ पैसे प्राप्त करने के लालच में बेटी को मां के गर्भ में जन्म लेने से पहले ही मार देते हैं। सभी नियमों और कानूनों को उन लोगों के (चाहे वे माता-पिता, डॉक्टरों, रिश्तेदारों, पड़ोसियों, आदि हों) खिलाफ सख्त और सक्रिय होना चाहिये जो लड़कियों के खिलाफ अपराध में शामिल हैं। केवल तभी, हम भारत में अच्छे भविष्य के बारे में सोच और उम्मीद कर सकते हैं। महिलाओं को भी मजबूत होना पड़ेगा और अपनी आवाज उठानी पड़ेगी। उन्हें महान भारतीय महिला नेताओं जैसे; सरोजनी नायड़ू, इंदिरा गाँधी, कल्पना चावला, सुनिता विलियम्स आदि से सीख लेनी होगी। इस संसार में महिलाओं के बिना सब-कुछ अधूरा है जैसे; आदमी, घर और स्वंय एक संसार। इसलिए मेरा/मेरी आप सभी से नम्र निवेदन है कि कृपया आप सभी स्वंय को कन्या बचाओ अभियान में शामिल करें।

भारतीय समाज में बेटियों की स्थिति

भारतीय समाज में बेटियों की स्थिति बहुत समय से विवाद का विषय बनी हुई है। आमतौर पर प्राचीन समय से ही देखा जाता है कि लडकियों को खाना बनाने और गुड़ियों के साथ खेलने में शामिल होने की मान्यता होती है जबकि लडके शिक्षा और अन्य शारीरिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। ऐसी पुरानी मान्यताओं की वजह से लोग महिलाओं के खिलाफ हिंसा करने को आतुर हो जाते हैं। इसके परिणाम स्वरूप समाज में बालिकाओं की संख्या लगातार कम होती जा रही है।

कन्या भ्रूण हत्या पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ निबंध

कन्या भ्रूण हत्या अस्पतालों (हॉस्पिटल्स) में चयनात्मक लिंग परीक्षण के बाद गर्भपात के माध्यम से किया जाना वाला बहुत भयानक कार्य है। ये भारत में लोगों की लड़कों में लड़कियों से अधिक चाह होने के कारण विकसित हुआ है। इसने काफी हद तक भारत में कन्या शिशु लिंग अनुपात में कमी की है। ये देश में अल्ट्रासाउंड तकनीकी के कारण ही सम्भव हो पाया है। इसने समाज में लिंग भेदभाव और लड़कियों के लिये असमानता के कारण बड़े दानव (राक्षस) का रुप ले लिया है। महिला लिंग अनुपात में भारी कमी 1991 की राष्ट्रीय जनगणना के बाद देखी गयी थी। इसके बाद ये 2001 की राष्ट्रीय जनगणना के बाद समाज की एक बिगड़ती समस्या के रूप में घोषित की गयी थी। हालांकि, महिला आबादी में कमी 2011 तक भी जारी रही। बाद में, कन्या शिशु के अनुपात को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा इस प्रथा पर सख्ती से प्रतिबंध लगाया गया था। 2001 में मध्य प्रदेश में ये अनुपात 932 लड़कियाँ/1000 लड़कें था हालांकि 2011 में 912/1000 तक कम हो गया। इसका मतलब है, ये अभी भी जारी है और 2021 तक इसे 900/1000 कम किया जा सकता है। इस समस्या ने भारत में बहुत हद तक कन्या शिशु लिंग अनुपात में कमी की है।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ जागरूकता अभियान

बेटी बचाओ बेटी पढाओ एक ऐसी योजना है जिसका अर्थ होता है कन्या शिशु को बचाओ और इन्हें शिक्षित करो। इस योजना को भारतीय सरकार के द्वारा 22 जनवरी, 2015 को कन्या शिशु के लिए जागरूकता का निर्माण करने के लिए और महिला कल्याण में सुधार करने के लिए शुरू किया गया था।

इस अभियान को कुछ गतिविधियों जैसे – बड़ी रेलियों, दीवार लेखन, टीवी विज्ञापनों, होर्डिंग, लघु एनिमेशन, वीडियो फिल्मों, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ निबंध लेखन, वाद-विवाद बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नारे प्रचार-प्रसार आदि को आयोजित करके लोगों में फैलाया गया था। इस अभियान को बहुत से सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों द्वारा समर्थित किया गया है।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना देश की बेटियों की आने वाली जिंदगी को सुधारने वाली मुहीम और हमारे देश की भविष्य लिखने वाली अहम कलम है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बहुत ही सुरक्षित वातावरण लाएंगी।

इस अभियान को समाज के हर वर्ग के लोगों ने बहुत ही प्रोत्साहित किया है। हमारे समाज में ऐसे बहुत से घर या परिवार हैं जहाँ पर लडकियों को बराबर नहीं समझा जाता है, लडके-लडकियों में भेदभाव किया जाता है। लडकियों को परिवार में वह दर्जा नहीं मिलता है जिसकी वे हकदार होती हैं।

लडकियों को अपने ही घर परिवार में अपने पक्ष को रखने का अधिकार भी नहीं दिया जाता है। लडकियों को वस्तु की तरह समझा जाता है जिन्हें स्नेह भावना, प्यार और ममता बस एक सपने के समान लगता है। इन सभी कुरीतियों को खत्म करने और समाज के मनोभाव को सुधारने के लिए ही बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान को चलाया गया है।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ जागरूकता अभियान के लाभ

  1. इससे देश मैं हो रहे महिलाओं के अत्याचार को रोका जा सकता है |
  2. इस योजना से पूरे जीवन-काल में शिशु लिंग अनुपात में कमी को रोकने में मदद मिलेगी |
  3. महिलाओं के सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों का समाधान होगा |
  4. कन्या शिशु के प्रति समाज के नजरिए में परिवर्तनकारी बदलाव लाने का प्रयास |
  5. बेटियों को उनका बराबर का हक मिलना व उनको उनके शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना |
  6. विभिन कार्येक्रम के माध्यम से समाज में फैले बेटियों के प्रति कुकृतियों को मिटाना |
  7. समाज के लोगो को एक नाइ दिशा प्रदान करना |
  8. दहेज़ प्रथा का बंद होना |
  9. टीवी विज्ञापनों, वीडियो फिल्मों, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ निबंध लेखन, वाद-विवाद
    बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नारे प्रचार-प्रसार के जरिये समाज , व देश को शिक्षित करना |

बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान के महत्वपूर्ण कदम

भारत सरकार द्वारा लडकियों को बचाने और शिक्षित करने के उददेश्य से बहुत से कदम उठाए गये हैं व निर्णय लिए गए । इस विषय में सबसे बड़ी पहल बेटी बचाओ बेटी पढाओ है जिसे बहुत ही सक्रिय रूप से सरकार, एनजीओ, कॉर्पोरेट समूहों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं और गैर सरकारी संगठनों ने आगे बढ़ाया है।

इसी दिशा में आगे कदम बढ़ाते हुए भारत सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना की शुरूआत की है जिसके तहत लड़कियों की पढाई और शादी के लिए सरकार पैसे मुहैया कराएगी। सन् 1961 से कन्या भ्रूण हत्या एक गैर कानूनी अपराध है और लिंग परीक्षण के बाद गर्भपात कराना प्रतिबंधित कर दिया गया है।

इन कदमों को समाज के लोगों को यह बताने के लिए लिया गया है कि लडकियाँ समाज में अपराध नहीं होती है अपितु भगवान का दिया हुआ एक अनमोल व बहुत ही खुबसुरत तोहफा होता हैं। बेटियों को बचाने और उनके सम्मान को बनाये रखने के लिए शिक्षा सबसे बड़ी क्रांति है। लडकी को सभी क्षेत्र में समान अवसर देने चाहिए।

सभी सार्वजनिक स्थानों पर लडकियों के लिए रक्षा और सुरक्षा आयोजित करनी चाहिए। विभिन्न सामाजिक संगठनो ने महिला स्कूलों में शौचालय के निर्माण से अभियान में मदद की है। बालिकाओं और महिलाओं के विरुद्ध अपराध भारत में विकास के रास्ते में बहुत बड़ी बाधा है।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की आवश्यकता

Beti Bachao Beti Padhao Nibandh In Hindi
Beti Bachao Beti Padhao Nibandh In Hindi

बेटी किसी भी क्षेत्र में लडकों की तुलना में कम सक्षम नहीं होती है और लडकियाँ लडकों की अपेक्षा अधिक आज्ञाकारी, कम हिंसक और अभिमानी, होनहार साबित होती हैं। लडकियाँ अपने माता-पिता की और उनके कार्यों की अधिक परवाह करने वाली होती हैं। एक महिला अपने जीवन में माता, पत्नी, बेटी, बहन की भूमिका निभाती है।

प्रत्येक व्यक्ति को यह सोचना चाहिए कि उसकी पत्नी किसी और आदमी की बेटी है और भविष्य में उसकी बेटी किसी और की पत्नी होगी। इसीलिए हर किसी को महिला के प्रत्येक रूप का सम्मान करना चाहिए। एक लडकी अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों को भी बहुत ही वफादारी से निभाती है जो लडकियों को लडकों से अधिक विशेष

बनाती है। बेटियां समाज की भिन्न अंग है जिसके बिना समाज को आगे बढ़ने की कल्पना नहीं की जा सकती है | लडकियाँ मानव जाति के अस्तित्व का परम कारण होती हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ का उद्देश्य

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के मिशन का मूल उद्देश्य समाज में पनपते लिंग असंतुलन को नियंत्रित करना है। हमारे समाज में कन्या भ्रूण हत्या बढती ही जा रही है जिसकी वजह से हमारे देश का भविष्य एक चिंताजनक विषय बन चुका है। इस अभियान के द्वारा कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध आवाज उठाई गयी है।

यह अभियान हमारे घर की बहु-बेटियों पर होने वाले अत्याचार के विरुद्ध एक संघर्ष है। इस अभियान के द्वारा समाज में नए क्रांति आने वाली थी जिससे लडकियों को समान अधिकार दिलाए जा सकते हैं। आज के समय में हमारे समाज में लडकियों के साथ अनेक प्रकार के अत्याचार किये जा रहे हैं जिनमें से दहेज प्रथा भी एक है। लडकियों को समाज में कन्या भ्रूण हत्या का सामना करना पड़ता है।

लेकिन अगर कोई लडकी पैदा भी हो जाती है तो जन्म के बाद बहुत सारे सामाजिक अत्याचारों का सामना करना पड़ता है जैसे – लडकियों को शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रखना, उन्हें समाज में अपने सही अधिकारों से वंचित रखना आदि। इन सभी आत्याचारों को खत्म करने के लिए यह अभियान बहुत हद तक सफल रहा है। बेटियों को पढ़ाकर हम अपने समाज की प्रगति को एक गति प्रदान कर सकते हैं।

हम अपनी बेटियों को पढ़-लिखकर अपने सपनों को हासिल करने का मौका दे सकते हैं जो भविष्य में कन्या भ्रूण हत्या और दहेज प्रथा को ना कहने की हिम्मत देगा। बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान हमारे देश के प्रधानमंत्री द्वारा चलाया गया एक मुख्य अभियान है। भारत का यह सपना है कि लडकियों को उनका अधिकार मिलना चाहिए और एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना चाहिए।

कन्या भ्रूण हत्या का कारण

कन्या भ्रूण हत्या, भ्रूण हत्या, उचित पोषण की कमी आदि भारत में लड़कियों की संख्या में कमी होने का मुख्य मुद्दा है। यदि गलती से लड़की ने जन्म ले भी लिया तो उसे अपने माता-पिता, परिवार के अन्य सदस्यों और समाज द्वारा अन्य प्रकार के भेदभावों और उपेक्षा का सामना करना पड़ता था जैसे; बुनियादी पोषण, शिक्षा, जीवन स्तर, दहेज हत्या, दुल्हन को जलाना, बलात्कार, यौन उत्पीड़न, बाल उत्पीड़न, आदि।

हमारे समाज में महिलाओं के खिलाफ हो रही सभी प्रकार की हिंसा को व्यक्त करना दुखद है। भारत वो देश है जहां महिलाओं की पूजा की जाती है और उन्हें माता कहा जाता है, तो भी आज तक विभिन्न तरीकों से पुरुषों द्वारा शासित हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 7,50,000 कन्याओं के भ्रूण का वार्षिक गर्भपात कराया जाता है विशेषरुप से पंजाब और हरियाणा में। यदि कन्या गर्भपात की प्रथा कुछ साल और प्रचलन में रही, तो हम निश्चितरुप से माताओं के बिना दिन देखेंगे और इस तरह कोई जीवन नहीं होगा।

आमतौर पर हम भारतीय होने पर गर्व करते हैं लेकिन किस लिए, कन्या भ्रूण हत्या और लड़कियों के खिलाफ हिंसा करने के लिए। मेरा मानना है, हम तब गर्व से खुद को भारतीय कहने का अधिकार रखते हैं जबकि महिलाओं का सम्मान करें और बेटियों को बचायें। हमें अपने भारतीय होने की जिम्मेदारी को समझना चाहिये और बुरे अपराधों पर बेहतर रोक लगानी चाहिये।

उपसंहार : –

देश के प्रत्येक नागरिक को कन्या शिशु बचाओ के साथ-साथ इनका समाज में स्तर सुधारने के लिए प्रयास करना चाहिए। लडकियों को उनके माता-पिता द्वारा लडकों के समान समझा जाना चाहिए और उन्हें सभी कार्यक्षेत्रों में समान अवसर प्रदान करने चाहिए। उन्हें उच्च से उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देना चाहिए जिससे समाज में सुधर आये

बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं अभियान को लोगों द्वारा एक विषय के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए ये एक सामाजिक जागरूकता का मुद्दा है जिसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं अभियान को प्रतेयक स्कूल के पाठ्य क्रम में जोड़ा जाना चाहिए| लडकियाँ पूरे संसार के निर्माण की शक्ति रखती हैं। लडकियाँ भी देश के विकास और वृद्धि के लिए समान रूप से आवश्यक होती है। लडकियाँ लडकों की तरह देश के विकास में समान रूप से भागीदार है। समाज और देश की भलाई के लिए उसे सम्मानित और प्यार किया जाना चाहिए।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध 600 शब्दो में

भारतीय नारी और समाज

अथवा

भारतीय समाज में नारी

“यत्र नार्यस्तु पूज्यते, रमन्ते तत्र देवता”

मनु ने वैदिककाल में कहा था की -“जहाँ नारियों की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं।”

प्राचीन भारत के इतिहास के पृष्ठ भारतीय नारी की गौरवमयी कीर्ति से भरे पड़े हैं। नारी को गृहलक्ष्मी, गृह देवी आदि से संबोधित किया गया है। यदि ध्यानपूर्वक देखा जाए तो अतीत के पृष्ठों में नारी के लिए माया, प्रपंच, महाठगिनी आदि संबोधन भी दिखाई दे जाते हैं। इसीलिए भारतीय समाज में नारी का क्या स्थान रहा है, तथा आज क्या है? इस विषय में निर्णायक रूप से कुछ भी कहना कठिन है। नारी की वास्तविक स्थिति के विषय में निश्चित रूप से केवल तभी कहा जा सकता है जब प्राचीनकाल से लेकर वर्तमानकाल तक की स्थिति को जाना व समझा जाए।

वैदिककाल में नारी के बिना जीवन अधूरा, अपूर्ण, व्यर्थ माना जाता था। उसकी पूर्णता के प्रतीक रूप में ही शंकर के ‘अर्धनारीश्वर’ स्वरूप की परिकल्पना प्रस्तुत की गई।

मध्यकाल में आकर पुरुष की निरंकुशता और अहंभाव ने नारी को उसके सम्मानजनक सिंहासन से व्यावहारिक दृष्टि से गिरा दिया, किंतु स्वार्थसिद्धि के लिए उसे भोगविलास की वस्तु बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

इस प्रकार मध्यकाल में नारी घर की चारदीवारी में कैद होकर रह गई। उसकी नियति अत्याचार सहना ही बनकर रह गया। उससे समस्त अधिकार छीन लिए गए। उस पर पर्दे को लाद दिया गया। बाल-विवाह, सती-प्रथा आदि कुप्रथाओं ने उसके जीवन को नर्क बना दिया।

रीतिकाल में तो नारी की दशा और भी शोचनीय हो गई। नारी को मात्र वासनापरक माना गया। धर्म स्थलों पर देवदासियों के रूप में नारी के उपयोग के मूल में भोग की कुत्सित भावनाएँ ही शामिल थीं। इस काल में नारी के माँ, बहन, बेटी के रूप की ओर ध्यान देने की किसी ने भी आवश्यकता नहीं समझी। नारी को केवल एक ही रूप में देखा गया-विलासिनी प्रेमिका के रूप में। इस काल के साहित्यकार भी केवल नारी के शारीरिक सौंदर्य का द्योतक हैं।

आधुनिक काल में नारी की स्थिति में काफ़ी परिवर्तन आ चुका है। अब वह न तो मीरा की भाँति प्रेम दीवानी है, न गोपियों की तरह आँसू बहाने वाली। वह अपने अधिकारों के प्रति सचेत है। आज की नारी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। आज वह सद्गृहिणी तो है ही, अध्यापक, इंजीनियर, वैज्ञानिक, डॉक्टर, पायलट, राजनीतिज्ञ आदि सभी रूपों में दृष्टिगोचर होती है। मानव के रूप में नारी समस्त मानवोचित अधिकार रखती है। नारी की स्थिति में और अधिक सुधार लाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस क्षेत्र में आधुनिक साहित्यकारों का सहयोग उल्लेखनीय है। प्रसाद जी ने नारी के विषय में लिखा है –

“नारी तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास रजत नग पग तल में।

पियूष स्रोत सी बहा करो, जीवन के सुंदर समतल में॥

अब प्रश्न यह उठता है कि क्या वास्तव में ही नारी स्वतंत्र अस्तित्व रखती है? इसका सीधा-सा उत्तर तो यही है जो पहले कहा जा चुका है कि वह समस्त मानवोचित अधिकार रखती है, किंतु संवैधानिक रूप में। व्यावहारिक रूप में तो नारी को आज भी पुरुष पर ही आश्रित रहना पड़ता है। नित्य बसों, रेलों, बस स्टॉप, चौक आदि पर पुरुषों की छेड़छाड़ से नारी आतंकरहित होकर कहीं आ जा नहीं सकती। पाशविक व्यवहार करने वाले पति से तलाक लेने पर नारी को समाज में हेय दृष्टि से देखा जाता है। यह ठीक है कि इन सब कारणों के पीछे नारी स्वयं भी पूर्णतया निर्दोष नहीं। वह भी पश्चिम की अंधाधुंध नकल करते हुए अपने मूल संस्कारों को भूलती जा रही है।

निष्कर्षतः

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कहा जा सकता है कि समाज रूपी रथ के पुरुष व नारी दो पहिए हैं। पुरुष यदि शक्तिशाली व कर्मठ है तो नारी भी सौम्यता, त्याग, ममता व साहस की खान है। इसीलिए नारी को समाज में सम्मानजनक पद मिलना ही चाहिए।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर भाषण हिंदी में

आदरणीय महानुभावों, शिक्षक एंव शिक्षिकाएं और मेरे प्यारे साथियों, सभी को सुप्रभात। आज यहाँ उपस्थित होने का कारण इस विशेष उत्सव के अवसर को मनाना है। इस अवसर पर, मैं अपने भाषण के माध्यम से बेटी बचाओ विषय को उठाना चाहता/चाहती हूँ। मुझे उम्मीद हैं कि आप सभी मेरा समर्थन करेंगे और इस भाषण के उद्देश्य को पूरा करने देंगे। जैसा कि

हम सभी जानते हैं, कि हमारे देश, भारत में बेटियों की स्थिति बहुत ही निम्न-स्तर की है। इस आधुनिक और तकनीकी संसार में, लोग बहुत चालाक हो गए हैं। वो परिवार में किसी भी नये सदस्य को जन्म देने से पहले लिंग परीक्षण के लिए जाते हैं। और आमतौर पर लड़की होने की स्थिति में वो गर्भपात कराने के विकल्प को चुनते हैं और बेटे होने की स्थिति में गर्भ को जारी रहने देते हैं। पहले समय में, क्रूर लोग बेटियों को जन्म के बाद मारते थे, हालांकि, आजकल वो अल्ट्रासाउंड के द्वारा लिंग चयनात्मक परीक्षण कराकर बेटी के भ्रूण को मां के गर्भ में ही मार देते हैं।

भारत में महिलाओं के खिलाफ गलत संस्कृति है कि लड़कियाँ केवल उपभोक्ता होती हैं वहीं बेटे रुपये देने वाले होते हैं। भारत में महिलाओं को प्राचीन काल से ही बहुत सी हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, एक बच्ची के जन्म लेने से पहले माँ के गर्भ में ही मार देना बहुत ही शर्मनाक है। पुराने लोग अपने बेटे की पत्नी से आशा करते थे कि वो बेटी को जन्म देने के स्थान पर एक बेटे को जन्म देगी। नये जोड़े पर अपने परिवार के सदस्यों और संबंधियों द्वारा बेटे को जन्म देने का दबाव डाला जाता है। इस तरह के मामलों में, उन्हें अपने सभी परिवार के सदस्यों को खुश करने के लिए गर्भावस्था के प्रारम्भिक दिनों में लिंग परीक्षण टेस्ट कराने जाना पड़ता है।

हालांकि, गर्भ में ही लड़की की मौत केवल यह ही उनके खिलाफ इकलौता मुद्दा नहीं है। उन्हें संसार में जन्म लेने के बाद भी बहुत कुछ झेलना पड़ता है जैसे: दहेज हत्या, कुपोषण, अशिक्षा, दुल्हन को जलाना, यौन शोषण, बाल शोषण, निम्नस्तरीय जीवन, आदि। यदि वो गलती से जन्म भी ले लेती है, तो उसे दंड़ के रुप में बहुत कुछ सहना पड़ता है और यहाँ तक कि उनकी हत्या भी कर दी जाती हैं क्योंकि उसका भाई अपने दादा-दादी, माता-पिता और संबंधियों को पूरा ध्यान प्राप्त करता है।

उसे सब कुछ समय समय पर नया मिलता रहता है जैसे – जूते, कपड़े, खिलौने, किताबें आदि वहीं लड़की को अपनी सारी इच्छाओं को मारना पड़ता है। उसे केवल अपने भाई को खुश देखकर खुश रहना सिखाया जाता है। उसे कभी-भी पोषण युक्त खाना और अच्छे स्कूल में बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का कभी मौका नहीं मिलता।

लिंग परिक्षण और लिंग चयनात्मक तकनीकें भारत में अपराध घोषित करने के बाद भी लोगों के द्वारा आज भी प्रयोग में लायी जाती हैं। यह पूरे देश में भारी व्यवसाय का बड़ा स्रोत है। बेटियों को भी बेटों की तरह समाज में समानता का मौलिक अधिकार प्राप्त है। देश में लड़कियों का घटता हुआ अनुपात हमें कुछ प्रभावी उपायों को अपनाकर इस समस्या को तोड़ने के लिए जगा रहा है। महिलाओं को उच्च और गुणवत्ता वाली शिक्षा और सशक्तिकरण की आवश्यकता है, ताकि वो अपने अधिकारों के लिए लड़ सकें। उन्हें सबसे पहले अपने बच्चें के बारे में सोचने का अधिकार है (चाहे बेटी हो या बेटा) न की किसी और को। इस मुद्दे को समाज से हटाने में उन्हें शिक्षित करना और लड़कियों के साथ भविष्य के निर्माण में बहुत सहायक होगा।

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इस प्रकार से हमारा इस Beti Bachao Beti Padhao nibandh in Hindi का यहाँ पोस्ट समप्त होता है आशा करता हू की आप सब को यह अच्छा लगा हो निचे हमे कमेंट कर के बातए एवं अगर आप लगता है | की हमने कोई पॉइंट विषय Beti bachao Beti Padhao essay in hindi, में छोड़ दिया है | तो अवश्य बातये

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