पेचिश (आंव) क्या है | पेचिश रोग कैसे होता है

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पेचिश रोग का अर्थ Dysentery Disease Meaning in Hindi.

पेचिश (आंव) क्या है Dysentery in Hindi बहुत से ऐसे लोग है जिन्हे अभी भी पेचिश के बारे में जानकारियाँ नहीं है. की आखिर पेचिश क्या है, पेचिश रोग कैसे होता है, पेचिश रोग के कारण तो आप सब के यही सवालों के जवाब लेकर आज हम आये है. अगर को जानना है. की आखिर पेचिश है क्या तो हमारा’आर्टिकल शुरू से पड़ते रहे। पेचिश यहाँ एक जटिल रोग है. जो बच्चो से लेकर वृद्ध तक को हो सकती है. पेचिश को इंग्लिश में ‘डिसेंट्री’ ( Dysentery ) कहा जाता है. यहाँ बड़ी आंत की बीमारी है. जो पाचन तंत्र से जुडी रोग है. जो पेट में ऐठन के साथ साथ बार बार थोड़ी थोड़ी मात्रा में चिपचिपा सा रक्त युक्त शौच होता है. बार बार शौच के कारन आंतो में सूजन आ जाती है. जब तक आंतो में सूजन रहती है. तब तक सफ़ेद (आंव) आती है. और जब सूजन घटाकर घाव बन जाता है. तब सफ़ेद आंव में घाव का खून भी शामिल होकर लाल आंव आने लगती है. इसे खुनी भदर या खुनी पेचिश कहते है यहाँ बहुत कष्ट दायी होता है इसमें दर्द बहुत ज्यादा होता है. आगे हम आपको पेचिश के कारन, पेचिश के लक्षण, पेचिश के घरेलु उपाए बताएँगे


पेचिश रोग के प्रकार | Types of Dysentery Disease in Hindi


पेचिश रोग मुख्यता 2 प्रकार के होते है :-

  1. बैक्टीरियल पेचिश – इस प्रकार की पेचिश रोग का मुख्य कारण दूषित भोजन और जल होता है। और बिना हाथ धोए ही खाना का सेवन है जिसके सेवन से पेट में बैक्टीरिया प्रवेश कर लेते है। इससे कई तरह के गंभीर लक्षण भी पैदा कर सकते है। इसलिए सफाई रखना बेहद जरुरी होता है।
  2. अमीबी पेचिश – इस तरह की पेचिश में कोशिकीय पैराडाइस के कारण फैलता है। यह खासतौर पर आंतो को प्रभावित करता है। अमीबा पैरासाइटिस अकेले नहीं बल्कि समूह के साथ संक्रमण करते है। इसके अलावा Cyst का निर्माण करते है। यह दूषित जगहों पर अधिक रहते है। यह शरीर के बाहर भी जीवित रह सकते है। इसमें शौचालय से आने के बाद तुरंत अपने हाथो की सफाई करनी चाहिए ताकि कोई संक्रमण शरीर में प्रवेश ना कर पाए।

पेचिश के कारन |या (आंव) के कारन | Causes of Dysentery Disease in Hindi


पेचिश (आंव) नीचे दिए गए कारणों की वजह से हो सकता है :-

  • पेचिश विरुद्ध भोजन करना जैसे दूध , मछली, को मिलकर खाना जैसे कारणों के कारन भी पेचिश होता है.
  • एक बार खाने के बाद थोड़े देर बाद फिर खाना अधिक सूखे, अधिक गर्म , अति पतले और अधिक ठन्डे प्रदार्थ के सेवन से भी पेचिश होता है.
  • अजीर्ण भी पेचिश रोग उत्पन्न करने में प्रमुख भूमिका निभाता है.
  • भय शोक आदि मानसिक विकार मलमूत्र आदि के वेगों को रोकने से या कृमि रोग होने से भी पेचिश पड़ने लगता है. क्योंकि इन कारणों से वायु कुपित होकर एकत्रित कफ को निचे की ओर ढकेलती है.
  • पेचिश दूषित भोजन, दूषित जल के सेवन के कारन भी होता है.
  • भोजन से पहले हाँथ को अच्छे से साफ़ न करना
  • आंतों में कीड़े , सड़ा गला भोजन के सेवन , गरिष्ठ भोजन के कारन भी पेचिश उत्पन्न हो जाते है
  • पानी कम मात्रा में पीना, साफ़ सफाई का ध्यान न रखना

अगर आपको पेचिश के यहाँ लक्षण नजर आते है. तो देर न करे तुरंत अपने निजी डॉक्टर को दिखाए व पेचिश का इलाज कराये अथवा समय पर इसका इलजा न हो पाए तो यहाँ पेचिश आपके शरीर में निर्जली (dehydration) का करण बन सकता है.

पेचिश के लक्षण |या (आंव) के लक्षण | Symptoms of Dysentery Disease in Hindi


पहले पतले दस्त शुरू होती है. जो बाद में पेचिश रोग में बदल जाती है. पेट में अचानक तेज दर्द व मरोड़ होता है. और बार बार मल त्यागने की इच्छा होती है. पेचिश रोग के दौरान बहुत जोर लगाने पर भी थोड़ा सा ही मल निकलता है. जप कफ युक्त होता है. बाद में पेचिश के लक्षण दिखाई देने लगते है। अर्थात मल के साथ साथ खून (रक्त ) निकलने लगता है. जिसे हम आम भाषा में खूनी पेचिश रोग कहते है.

कभी कभी तो मल का रंग हरा , पीला , भूरा , लाल , कई प्रकार के दिखाई देने लगते है. देखने मैं जो बहुत गन्दा होता है. जिसमें से सड़ी बदबू आती है

पेचिश के लक्षण के दौरान आपको दिन में 8 से 12 बार और उससे अधिक भी दस्त हो सकती है. जिससे आप अधिक कमजोर हो सकते है

खून की उल्टी होना, पेट ऐठन, मरोड़ा आना मल त्याग साफ़ न होना आदि पेचिश के लक्षण है

पेचिश रोग को ठीक करने के घरेलू नुस्खे | home remedies for dysentery Disease in hindi


  • दो चम्मच रोज धनिया उबालकर पिने से पेचिश रोग में बहुत ज्यादा लाभदायक होता है.
  • सुखाये हुए संतरे के छिलके और सूखे मुनक्के की बीज सामान मात्रा घोट कर 4 दिन लगातार लेने से आंव बंद हो जाती है
  • गाय का दूध और पानी सम भाग में लेकर उबालें जब पानी जल जाए और केवल दूध रह जाए तो उसे उतार कर कुनकुना ही पिए इस प्रकार दिन में तीन बार पिने से पेचिस ख़तम हो जाती है.
  • ताजे छाछ मैं बेल का गुदा मिलाकर पिने से रक्तातिसार ( खुनी पेचिश ) का शमन होता है.
  • 2 ग्राम मेथी का चूर्ण दही के साथ मिलकर दिन में तीन बार पीने से पेचिश रोग से छुटकारा मिलता है.
  • मेथी के पत्तों के रस में काली द्राक्ष का रस मिलकर पिने से भी पेचिश रोग में पीड़ित को आराम मिलता है.
  • 2 से 4 ग्राम के बीच सोंठ का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेने से अथवा सोंठ का कवाथ बनाकर उसमें 1 चम्मच एरंड का तेल डालकर पिने से पेचिश रोग दूर हो जाता है.
  • पके निंबू को गर्म करके उसका रस निकलकर इसमें थोड़ा सा सेंधा नमक व शक्कर मिलकर पीने से आंव से छुटकारा मिलता है.
  • बेल का जूस निकलकर पिने से भी पेचिश रोग दूर होता है

पेचिश रोग निष्कर्ष | Dysentery Disease Conclusion in Hindi


पेचिश रोग होने पर अवश्य रूप से खान – पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए पचने में हल्का और बलकारक प्रदार्थ का सेवन करें मट्टा, दही ,चावल का मांड,साबूदाना ,जौ , निम्बू , अनार , खिचड़ी , बेल , अनार आदि का अपने खान पान में अवश्य रूप से सेवन करे।

पेचिश रोग ( Dysentery Disease ) होने पर पूड़ी ,कचौड़ी , रोटी , पराठे , तैलीय प्रदार्थ से जितना ज्यादा हो सके दुरी बनाये रखे।

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FAQ About Dysentery Disease in Hindi.

अमीबी पेचिश क्या है

अमीबी पेचिश एक एंटामोइबा हिस्टोलिटिका संक्रमण ऐम्बायसिस एक बीमारी है जो परजीवी एंटामोइबा हिस्टोलिटिका (parasite Entamoeba histolytica) के कारण होती है। यह किसी को भी सकता है.

पेचिश के लक्षण इन हिंदी

पहले पतले दस्त शुरू होती है. जो बाद में पेचिश रोग में बदल जाती है. पेट में अचानक तेज दर्द व मरोड़ होता है.

और बार बार मल त्यागने की इच्छा होती है. पेचिश रोग के दौरान बहुत जोर लगाने पर भी थोड़ा सा ही मल निकलता है. जप कफ युक्त होता है. बाद में पेचिश के लक्षण दिखाई देने लगते है। अर्थात मल के साथ साथ खून (रक्त ) निकलने लगता है. जिसे हम आम भाषा में खूनी पेचिश रोग कहते है.

कभी कभी तो मल का रंग हरा , पीला , भूरा , लाल , कई प्रकार के दिखाई देने लगते है. देखने मैं जो बहुत गन्दा होता है. जिसमें से सड़ी बदबू आती है

पेचिश के लक्षण के दौरान आपको दिन में 8 से 12 बार और उससे अधिक भी दस्त हो सकती है. जिससे आप अधिक कमजोर हो सकते है

खून की उल्टी होना, पेट ऐठन, मरोड़ा आना मल त्याग साफ़ न होना आदि पेचिश के लक्षण है

पेचिश के जीवाणु का नाम

पेचिश के जीवाणु का नाम  एंटामीबा हिस्टॉलिटिका है

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